Home » राजनीति » Along with Sidhu, his wife Navjot Kaur and former hockey captain Pargat Singh too will join the Congress.
 

EXCLUSIVE: 'हाथ' के साथ जाएंगे सिद्धू, आवाज़-ए-पंजाब का कांग्रेस में होगा विलय

आकाश बिष्ट | Updated on: 23 November 2016, 16:43 IST
(फाइल फोटो)
QUICK PILL
  • नवजोत सिंह सिद्धू कई महीने से चल रही अटकलों को खारिज करते हुए कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं.
  • लुधियाना के बैंस बंधुओं के आप का दामन थामने के बाद सिद्धू के पास कोई विकल्प नहीं बचा था.
  • सिद्धू की पार्टी में एंट्री से कांग्रेस को बढ़त मिलेगी, जो बैंस बंधुओं के आप में शामिल होने के बाद बैकफुट पर थी.
  • सिद्धू ने हाल ही में राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था. उनकी पत्नी नवजोत कौर ने भी भाजपा को अलविदा कह दिया था.

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले नवजोत सिंह सिद्धू कई महीने से चल रही अटकलों को खारिज करते हुए कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं. कैच को कांग्रेस सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से बुधवार को मुलाकात के बाद हाल ही में बने उनके मोर्चे आवाज़-ए-पंजाब का कांग्रेस पार्टी में विलय होगा.

सिद्धू के साथ ही उनकी पत्नी नवजोत कौर और पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह भी कांग्रेस में शामिल होंगे. परगट ने हाल ही में शिरोमणि अकाली दल से इस्तीफा दिया था.

पंजाब में विधानसभा चुनाव में अब महज दो महीने बचे हैं. लुधियाना के बैंस बंधुओं के आम आदमी पार्टी का दामन थामने के बाद सिद्धू के पास कोई विकल्प नहीं बचा था. बताया जा रहा है कि बैंस बंधु कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में थे, लेकिन कांग्रेस आवाज-ए-पंजाब का विलय चाहती थी. सिद्धू की तरफ से विलय के समर्थन को भांपते हुए बैंस बंधुओं ने पहले ही उनका साथ छोड़ दिया.

बैंस बंधु कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में थे, लेकिन कांग्रेस आवाज-ए-पंजाब का विलय चाहती थी.

कैच को सूत्रों से जानकारी मिली है कि कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पार्टी आलाकमान को सिद्धू को शामिल करने पर राजी कर लिया. किशोर को लगता है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में सिद्धू का आने से पार्टी को बड़ा फायदा होगा.

प्रशांत किशोर के दबाव के बाद राहुल गांधी समेत वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ कई दौर की बैठक और सिद्धू के साथ कई मुलाकात के बाद पूर्व क्रिकेटर अपने मोर्चे का कांग्रेस में विलय करने को तैयार हो गए.

बादल परिवार के खिलाफ सख्त रवैए के चलते सिद्धू पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों की नजर थी, हालांकि बैंस बंधुओं की तरफ से सिद्धू के कांग्रेस का हाथ थामने की पुष्टि के बाद अरविंद केजरीवाल ने सिद्धू की तरफ से नजरें हटा लीं.

अब सबसे अहम पहलू यह है कि सिद्धू को किस तरह से कांग्रेस में समायोजित किया जाएगा, क्योंकि राज्य में कांग्रेस पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह की मजबूत पकड़ है. बैंस बंधुओं के दावे के मुताबिक सिद्धू ने कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार नामित होने के लिए काफी मोल-भाव किया.

बैंस बंधुओं का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व क्रिकेटर को मुख्यमंत्री उम्मीदवार का प्रस्ताव देने के लिए भी तैयार था. हालांकि उनके दावे के उलट कांग्रेस में ज्यादातर लोग इस बात को नहीं मानते. उनका मानना है कि अगर ऐसा कुछ होता, तो कैप्टन विद्रोह कर देते, जिससे राज्य में पार्टी की चुनावी संभावनाओं को झटका लगता.

कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पार्टी आलाकमान को सिद्धू को शामिल करने पर राजी कर लिया.

कैच से बातचीत में पंजाब के एक कांग्रेसी नेता ने कहा, "अगर किसी और को सीएम कैंडीडेट बनाया जाता, तो पार्टी चुनाव हार जाएगी. कैप्टन की अगुवाई में ही कांग्रेस राज्य में पुनर्जीवित हो रही है और किसी को भी यह मंजूर नहीं होगा कि बाहरी शख्स को यह पोस्ट ऑफर की जाए यह बिल्कुल असंभव है."

हालांकि पार्टी में कैप्टन के विरोधियों खासकर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा इस रणनीति के समर्थन में हैं कि सिद्धू को पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी दी जाए. चूंकि कांग्रेस ने अभी विधानसभा चुनाव में अपने सीएम उम्मीदवार का एलान नहीं किया है, लिहाजा कैप्टन विरोधी गुट को उम्मीद है कि सिद्धू कैप्टन की सीएम बनने की आकांक्षा को पटरी से उतार सकते हैं.

इससे पहले सिद्धू ने कहा था कि वे कांग्रेस में तभी शामिल होंगे, जब कैप्टन इसका हिस्सा नहीं होंगे. सिद्धू ने बादल और अमरिंदर सिंह के बीच साठगांठ का भी आरोप लगाया था. हालांकि दोनों के बीच स्थितियां उस वक्त सामान्य हो गईं, जब कैप्टन ने सिद्धू की कांग्रेस में संभावित एंट्री का स्वागत किया. 

कैप्टन विरोधी गुट को उम्मीद है कि सिद्धू कैप्टन की सीएम बनने की आकांक्षा को पटरी से उतार सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक कैप्टन और सिद्धू के बीच मेल-मिलाप हो गया है. इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विलय को लेकर परगट सिंह के संपर्क में थे. पार्टी ने जालंधर कैंट विधानसभा सीट से परगट के लड़ने की इच्छा पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. परगट इसी सीट से 2012 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल के टिकट से जीते थे.

सियासी जानकारों की मानें तो शह और मात के इस खेल में सिद्धू की पार्टी में एंट्री से कांग्रेस को बढ़त मिलेगी, जो बैंस बंधुओं के आप में शामिल होने के बाद बैकफुट पर थी.

First published: 23 November 2016, 16:43 IST
 
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