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चीफ जस्टिस के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले चार जजों को नहीं मिली 'संवैधानिक बेंच' में जगह

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 January 2018, 10:09 IST

भले ही सोमवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद को सुलझा लेने की बात कही थी, लेकिन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और उनके खिलाफ मोर्चा खोलने वाले चार जजों के बीच मामला सुलझता नहीं दिख रहा है.

क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम मामलों की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ का गठन किया. लेकिन इसमें सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जजों जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ को शामिल नहीं किया गया है.

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ वही चार जज हैं जिन्होंनें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ मोर्चा खेलते हुए मीडिया के सामने आकर प्रेस कांफ्रेंस की थी.

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पांच न्यायाधीशों की पीठ में सीजेआई दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल हैं. यह संविधान पीठ 17 जनवरी से कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई शुरू करेगी.

अदालत के सूत्रों ने कहा कि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि सीजेआई ने आज उन चार न्यायाधीशों से मुलाकात की या नहीं जिन्होंने 12 जनवरी को संवाददाता सम्मेलन में सीजेआई के खिलाफ आरोप लगाये थे.

सोमवार की कार्यसूची के अनुसार पांच न्यायाधीशों की पीठ आधार कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामले और सहमति से वयस्क समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के फैसले को चुनौती देने से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करेगी.

इन्हीं न्यायाधीशों ने पिछले साल 10 अक्तूबर से संविधान पीठ के विभिन्न मामलों में सुनवाई की थी. इनमें प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच टकराव का मामला भी है.

First published: 16 January 2018, 10:09 IST
 
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