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मोदी सरकार के 4 साल : ऐसे तय हुआ मोदी का 8 से 20 तक का सफर

सुनील रावत | Updated on: 26 May 2018, 16:45 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब साल 2014 में गद्द्दी संभाली उस वक्त देश के आठ राज्यों में बीजेपी की सरकार थी और बीते चार वर्षों में देश के 20 राज्यों में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने अपना कब्ज़ा कर लिया. पंजाब को छोड़ दें तो उत्तर के सभी राज्यों बीजपी का कब्ज़ा है. उत्तर-पूर्व में आठ राज्यों में से सात में बीजेपी का कब्जा हो चुका है.

बीजेपी अब पूर्व और दक्षिण में अपनी चुनावी और सामाजिक उपस्थिति बढ़ाने की सोच रही है जहां एनडीए की मामूली उपस्थिति है. पार्टी के नेताओं का मानना है कि मोदी की अविश्वसनीय लोकप्रियता अब ममता बनर्जी और नवीन पटनायक छत्रपों को भी बाहर कर देगी.

मोदी के नेतृत्व में बीजेपी एक केंद्रीय शक्ति बन चुकी है यही कारण है कि पूरा विपक्ष और क्षेत्रीय दल बीजेपी के खिलाफ एक साथ आ रहे हैं. राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी के बढ़ते प्रभुत्व को इस तथ्य से स्थापित किया जा सकता है कि पिछले चार सालों में उसने कांग्रेस से 12 राज्य छीन लिए. जबकि मोदी के सत्ता में आने के बाद से एनडीए ने 14 चुनावी जीत दर्ज की.

वर्तमान में बीजेपी भारत की राजनीतिक स्थिति देश में इतनी मजबूत हो चुकी है कि कॉर्पोरेट का चंदा लगातार उसे मिल रहा है. बीजेपी ने हालही में देश की राजधानी में अपने लिए एक आलीशान दफ्तर बना लिया और बाकी राज्यों में भी पार्टी लगातार जमीन खरीद रही है. 

कर्नाटक के अलावा जहां कांग्रेस ने जनता दल (सेक्युलर) के साथ चुनाव के बाद गठबंधन बनाया, वह अब सिर्फ पंजाब, मिजोरम और पुडुचेरी में बची है. प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी सफलता यही यही कि उन्होंने अपने लोकप्रियता के दम पर बीजेपी को लागातार चुनावी सफलताएं दिलाई. 

2019 के लोकसभा चुनावों के लिए एक साल से भी कम समय बचा है और कांग्रेस अब सभी विपक्षी दलों को भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने के लिए तैयार कर रही है. कर्नाटक में शपथ ग्रहण के दौरान 15 से अधिक विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति इसके संकेत दिए.

अपने पांच साल के कार्यकाल के आखिरी दौर में एनडीए को तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में एक बड़ी चुनावी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.यह कांग्रेस के लिए भी एक परीक्षण होगा, जो 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले खुद को फिर से गढ़ने का प्रयास कर रही है.

हालही में प्रकाशित एक रिपोर्ट की माने तो कांग्रेस का फंड लगातार ख़त्म हो रहा है. राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाला चंदा सारा सत्ताधारी बीजेपी के पक्ष में जा रहा है. ऐसे में कांग्रेस के लिए 2019 की चुनती सबसे बड़ी होगी.

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First published: 26 May 2018, 16:35 IST
 
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