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गोवा में 16 मार्च को होगा बहुमत परीक्षण, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 March 2017, 13:17 IST
(फाइल फोटो)

गोवा में सरकार गठन पर तकरार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च को बहुमत परीक्षण का आदेश दिया है. दरअसल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी. इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 16 मार्च को सुबह 11 बजे विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराया जाए. 

बीजेपी ने अपने पास बहुमत होने का दावा किया था. इसके बाद राज्यपाल ने मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए न्योता दिया था. दरअसल गोवा में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. 40 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस 17 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है.

बीजेपी को 13 सीटों पर ही जीत हासिल हो सकी. हालांकि बीजेपी ने महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के तीन, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के तीन और दो निर्दलीयों के समर्थन का दावा किया है. कांग्रेस का कहना है कि सबसे बड़ा दल होने के नाते उसे सबसे पहले सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए. एक नज़र गोवा विधानसभा की वर्तमान स्थिति पर:

भारत निर्वाचन आयोग

पर्रिकर के शपथ ग्रहण को हरी झंडी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार शाम को होने वाले शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार किया है. दरअसल मनोहर पर्रिकर ने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देते हुए राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा पेश किया था, जिसे मंजूर करते हुए गवर्नर मृदुला सिन्हा ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता देते हुए 15 दिन के अंदर बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था.

कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आपके पास विधायकों की पर्याप्‍त संख्‍या थी तो आपको समर्थन करने वाले विधायकों का हलफनामा पेश करना चाहिए था, लेकिन आपकी ओर से ऐसा नहीं किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देना विधायकों की संख्‍या से जुड़ा हुआ है. आपने राज्‍यपाल के सामने अपने दावे में इस बात का कभी जिक्र नहीं किया कि आपके पास जरूरी समर्थन है. 

'बहुमत के बारे में बताया क्यों नहीं?' 

सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च को होने वाले फ्लोर टेस्ट के लिए दोनों पार्टियों को प्रोटेम स्‍पीकर का नाम सुझाने को भी कहा है. सरकार की तरफ से इस मामले में वरिष्‍ठ वकील हरीश साल्‍वे और कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर आपके पास बहुमत था, तो आपको राज्‍यपाल के आवास के बाहर धरना देकर अपने विधायकों की संख्‍या के बारे में बताना चाहिए था. कांग्रेस ने दलील दी कि राज्‍यपाल को कांग्रेस विधायक दल के नेता से फोन पर 'संख्‍या' के बारे में  बात करनी चाहिए थी. कांग्रेस ने कहा कि उसके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्‍याबल है और आज ही सदन में शक्ति परीक्षण करा लिया जाए. 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस का पक्ष रखने वाले पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की आपत्ति को मानते हुए कहा है कि 16 मार्च को प्रदेश की विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराया जाए. अगर मनोहर पर्रिकर बहुमत नहीं साबित कर पाते हैं तो वे गोवा के दो दिन के मुख्यमंत्री रहेंगे.

'कोई हॉर्स ट्रेडिंग नहीं'

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गोवा में विधायकों की ख़रीद-फरोख्त के कांग्रेस के आरोप को खारिज किया है. गडकरी ने कहा, "गोवा में कोई हॉर्स ट्रेडिंग नहीं हो रही है. गैर बीजेपी विधायकों के साथ हमारी बातचीत हुई थी. उन्होंने कुछ शर्तें रखी थीं, लेकिन समर्थन को लेकर एकमत हैं."

गडकरी ने साथ ही कहा, "आंतरिक गतिरोध की वजह से कांग्रेस अपना नेता नहीं चुन सकी और वे इसके लिए हमें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं."

First published: 14 March 2017, 12:26 IST
 
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