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नोटबंदी: गोविंदाचार्य बोले, मोदी सरकार की नीयत सही, तरीका बिल्कुल ग़लत

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 November 2016, 15:10 IST
(पीटीआई)

नोटबंदी पर जहां एक तरफ मोदी सरकार कह रही है कि इस फैसले से जनता काफी खुश है, वहीं बीजेपी के पूर्व थिंकटैंक कहे जाने वाले केएन गोविंदाचार्य ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है.

गोविंदाचार्य ने नोटबंदी के बाद उसकी वजह से मरने वाले लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखाी है और पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग की है.

नोटबंदी को लागू करने को लेकर सरकारी नीति पर भी गोविंदाचार्य ने कई गंभीर सवाल उठाये हैं. समाचार चैनल एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में गोविंदाचार्य ने कहा कि उन्होंने इसके बाबत सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को बुधवार की शाम को पत्र याचिका भेजी है.

इस याचिका में उन्होंने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट स्वयं संज्ञान लेकर देशभर के पीड़ित लोगों को मुआवजा देने का आदेश दे. नोटबंदी की वजह से गरीब लोग अपने ही पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं.

याचिका में गोविंदाचार्य ने कहा है कि 80 से ज्यादा लोगों की दुखद मौत हो चुकी है और तमाम लोग बेरोजगार हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन लाचार लोगों की समस्याओं का निवारण अवश्य होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि दिहाड़ी मज़दूरों का काम ख़त्म हो रहा है, किसान के पास रबी की बुवाई के लिए बीज नहीं है और छोटे-मोटे कारोबारी भी बंदी की कगार पर हैं.

गोविंदाचार्य ने कहा कि शुरू में तो उन्हें मोदी सरकार का यह कदम बड़ा साहसिक लगा, सरकार ने आश्वासन दिया कि दो दिनों के भीतर बैंकों में हालात ठीक हो जाएंगे, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ने लगी.

उनके मुताबिक इस समय देश का हाल बहुत बुरा है. उन्हें उम्मीद नहीं थी कि नोटबंदी के बाद देस के हालात इतने खराब हो जाएंगे.

संघ के पूर्व प्रचारक गोविंदाचार्य ने कहा कि इस मामले में मोदी सरकार का लक्ष्य ही साफ़ नहीं है. यह पता नहीं चल पा रहा है कि सरकार क्या चाहती है? अगर जाली नोट बंद करना चाहती है तो उसके लिए इतना बड़ा कदम उठाने कि क्या जरूरत थी?

वो कहते हैं कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 14 लाख करोड़ के बड़े नोटों में जाली नोट सिर्फ 400 करोड़ हैं और उसके लिए सरकार ने पूरी करेंसी को रद्द करके जनता को लाइन में खड़ा कर दिया.

नोटबंदी के बजाय अगर 30 दिसम्बर तक नोट बदलने का समय दिया जाता तो जाली नोट ख़त्म हो जाते. कालाधन तो नगदी का थोड़ा हिस्सा है, जिसे टैक्स नियमों में बदलाव तथा भ्रष्टाचार दूर करके की कम किया जा सकता है. बड़े लोग तो अपना पैसा विदेशों में रखते हैं, जिस पर तो सरकार ने प्रभावी कार्यवाही की ही नहीं वह लोग बच जाएंगे.

उनके मुताबिक इतने बड़े काम के लिए बेहतर टीम वर्क की ज़रूरत थी, जिसका इस बड़े निर्णय में अभाव दिखता है, इसीलिये सरकार हर दिन नया आदेश दे रही है. इन सारे आदेशों को रिज़र्व बैंक के माध्यम से ही लागू किया जा सकता था, पर उसकी स्वायत्तता की भी अनदेखी हो रही है. किसी ने इस निर्णय को तुगलकी फरमान भी बताया है.

सरकार अगर 2000 के नोट का साइज़ पुराने 1000 के नोट का रखती तो एटीएम में तकनीकी बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती और पुरानी साइज़ की ट्रे से ही काम चल जाता.

गोविंदाचार्य कहते हैं कि नोटबंदी के फैसले में हो सकता है कि सरकार की नीयत सही हो सकती है, लेकिन इसका तरीका बिलकुल गलत हैं.

First published: 26 November 2016, 15:10 IST
 
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