Home » राजनीति » Hamid ansari said Many felt PM Narendra Modi comment not accepted practice
 

पूर्व उप-राष्ट्रपति बोले- कई लोग मानते हैं PM मोदी की मुझपर वो टिप्पणी परंपरा के खिलाफ थी

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 July 2018, 12:56 IST

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राज्यसभा में अपने कार्यकाल के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई टिप्पणियों पर पहली बार जवाब दिया है. हामिद अंसारी ने कहा कि 'काफी लोगों का ऐसा विचार है कि विदाई भाषण के वक्त की गई उनकी टिप्पणी परंपरा के अनुकूल नहीं थी. अंसारी ने इन मुद्दों का उल्लेख अपनी नई पुस्तक ‘‘डेयर आई क्वेश्चन? रिफ्लेक्शंस ऑन कंटेपररी चैलेंजेज’’ में किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार हामिद अंसारी ने कहा कि ''प्रधानमंत्री ने इस विदाई समारोह में हिस्सा लिया था और कार्यकाल की प्रशंसा के दौरान उन्होंने मेरे व्यक्तिगत रुझानों की ओर भी संकेत दिए''. अंसारी ने कहा ''उन्होंने मुस्लिम मुल्कों में बतौर राजदूत मेरे कार्यकाल का उल्लेख किया था. राजदूत के पद से सेवानिवृत होने के बाद अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर मेरी सक्रियता की तरफ उनका संकेत था.''

पूर्व उप राष्ट्रपति ने कहा, 'उनका संकेत शायद बेंगलुरु में दिए मेरे उस भाषण और राज्यसभा टीवी को दिए इंटरव्यू का था जिसमें मैंने कहा था कि अल्पसंख्यक और कुछ दूसरे समुदाय के युवाओं में बेचैनी और असुरक्षा का भाव है.'

सोशल मीडिया पर अपनी आलोचना करनेवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए अंसारी ने कहा, 'सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ वफादार लोगों ने इस बयान के खिलाफ एक तरीके से दुष्प्रचार की मुहिम ही छेड़ दी. दूसरी तरफ, कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्होंने अखबारों में इससे संबंधित लेख और गंभीर संपादकीय लिखे और उनमें माना कि विदाई समारोह के दौरान पीएम की टिप्पणी संसदीय परंपरा के अनुकूल नहीं थी.'

ये भी पढ़ें : BJP सांसद ने कहा- पार्टी की नहीं साफ नियत, अगला चुनाव हार जाएंगे 90 फीसदी सांसद और MLA

विदाई भाषण में क्या कहा था हामिद अंसारी ने 

हामिद अंसारी ने अपने विदाई भाषण में देश के पहले उप राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन को उद्धृत करते हुए कहा था कि 'अगर विपक्ष को निष्पक्ष तरीके से, स्वतंत्रता के साथ और बेबाकी से अपनी बात रखने की इजाजत नहीं दी गई तो लोकतंत्र, निरंकुश शासन में बदल जाएगा'.

उप राष्ट्रपति के तौर पर आखिरी दिन अंसारी ने राज्यसभा में दिए अपने विदाई भाषण में कहा कि राज्यसभा संविधान द्वारा गठित है और इसके संस्थापक चाहते थे कि ऊपरी सदन देश की विविधता का प्रतिनिधित्व करे, हड़बड़ी में बिना पर्याप्त विचार विमर्श के लाए गए कानूनों पर रोक लगाए.

अंसारी ने कहा, "राज्यसभा को देश के कार्य में बाधक नहीं बनना चाहिए और वास्तव में यह सदन अपरिहार्य रूप से बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य की शुरुआत से जुड़ा है." अंसारी ने देश के पहले उप राष्ट्रपति राधाकृष्णन को उद्धृत करते हुए कहा, "एक लोकतंत्र की विशिष्टता इससे पता चलती है कि वह अपने अल्पमत को कितनी सुरक्षा मुहैया कराता है. अगर विपक्षी धड़ों को निष्पक्षता से, स्वतंत्रतापूर्वक और बेबाकी से सरकार की नीतियों की आलोचना करने की इजाजत नहीं दी जाती है तो कोई भी लोकतंत्र, निरंकुश शासन में बदल जाएगा."
First published: 9 July 2018, 12:50 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी