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राजीव गांधी और अमिताभ की दोस्ती में इस चिंगारी ने लगाई थी आग, पूरे देश में आया था बवंडर

आदित्य साहू | Updated on: 20 August 2018, 11:24 IST

Rajeev Gandhi birthday: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था. राजीव गांधी देश के सातवें और भारतीय इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने थे. शुरुआत में उन्हें राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी और वो एक एयरलाइन पायलट की नौकरी करते थे. लेकिन जब आपातकाल के बाद उनकी मां इंदिरा गांधी को सत्ता गंवानी पड़ी और साल 1980 में छोटे भाई संजय गांधी की हवाई जहाज दुर्घटना में मृत्यु हो गई तो उन्हें मजबूरन मां इंदिरा का सहयोग करने के लिए राजनीति में एंट्री करनी पड़ी. इसके बाद वह संजय गांधी की लोकसभा सीट से सांसद बने और साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बन गए.

जब वह पीएम थे तो उनकी और बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन की दोस्ती के चर्चे खूब आम थे. उनकी दोस्ती की मिसाल दी जाती थी. इस दोस्ती की शुरुआत तब से हो गई थी जब राजीव गांधी दो साल के और अमिताभ बच्चन महज चार साल के थे. यहां तक कि अमिताभ बच्चन राजनीति में भी आए थे राजीव गांधी के कहने पर. लेकिन बाद में कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद उनकी दोस्ती तो टूटी ही साथ में देश में भी तूफान मच गया था. आइए आपको भी बताते हैं जय-वीरू की दोस्ती से लेकर दोस्ती में लगी आग की पूरी कहानी-

 

दोस्ती की शुरुआत
राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन की दोस्ती की शुरुआत तब से हुई जब जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे. तब अमिताभ के पिता और कवि हरिवंश राय बच्चन नेहरू सरकार में विदेश मंत्रालय में हिंदी ऑफिसर थे. नेहरू तब हरिवंश राय बच्चन के काम के कायल थे. फिर नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी की हरिवंश राय बच्चन की पत्नी तेजी बच्चन के साथ दोस्ती हुई और दोनों परिवारों के बीच मिलना जुलना बढ़ गया.

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दोनों का परिवार इलाहाबाद का रहने वाला था तो अक्सर ही उन लोगों का एक-दूसरे के घर आना जाना था. अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी का बचपन एक साथ खेलते-कूदते बीता. समय बीतने के साथ दोनों की दोस्ती और गहरी होती गई. राजीव गांधी और संजय गांधी ने स्कूली पढ़ाई दून स्कूल से की जबकि उस वक्त अमिताभ बच्चव और उनके भाई अजिताभ नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में पढ़ते थे.

हालांंकि जब भी वे साथ होते थे तो खूब मस्ती करते थे. राजीव गांधी के साथ पहली मुलाकात के बारे में अमिताभ बच्चन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो इलाहाबाद में एक फैंसी ड्रेस कॉम्पटीशन में हिस्सा लेने पहुंचे थे. उस कार्यक्रम में राजीव गांधी फ्रीडम फाइटर बने थे. दोस्ती इतनी गहरी थी कि जब राजीव पढ़ाई करने इंग्लैंड गए थे तो वहां से वो अमिताभ को चिट्ठी लिखा करते थे.

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एक बार राजीव गांधी इंग्लैंड से अमिताभ बच्चन के लिए जींस लेकर आए थे. अमिताभ को यह जींस इतनी पसंद आई कि सालों तक वो इसे पहनते रहे थे. तब राजीव गांधी के पास पुराना लंबरेटा स्कूटर था जिसे स्टार्ट करने के लिए अमिताभ बच्चन धक्का लगाया करते थे. यह जय-वीरू की दोस्ती तेजी से फल-फूल रही थी. जब राजीव गांधी की मंगेतर सोनिया गांधी इटली से पहली बार 13 जनवरी 1968 में भारत आई थीं तो अमिताभ उन्हें एयरपोर्ट पर लेने गए थे.

भारत आने के 43 दिन बाद सोनिया और राजीव की शादी हुई थी. तब तक सोनिया और उनके परिवारवाले अमिताभ बच्चन के घर पर ही रुके थे. तब अमिताभ की मां तेजी बच्चन ने सोनिया को भारतीय संस्कृति और रीति रिवाजों को समझाने में मदद की थी यहां तक कि सोनिया गांधी का कन्यादान भी हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन ने किया था.

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अमिताभ की राजनीति में एंट्री
यह 70-80 का दशक था. तब तक अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के एंग्री यंग मैन बन चुके थे. उस समय वह बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार थे. तब फिल्मों में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए राजीव गांधी ने अमिताभ बच्चन को राजनीति में आने का न्यौता दिया. अमिताभ ने यह न्यौता स्वीकार कर लिया और साल 1984 के आम चुनाव में अमिताभ कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लड़े और तब राजनीति के दिग्गज माने जाने वाले हेमवती नंदन बहुगुणा को पटखनी दी थी.

 

शुरू हुई दोस्ती में दरार-
बस अमिताभ का राजनीति में आना दोनों के बीच दोस्ती में दरार की शुरुआत थी. दोनों की दोस्ती के बीच दरार यहीं से पड़ना शुरू हुई. इसी बीच राजीव की सरकार बोफोर्स घोटाले में फंसी और इसके लपेटे पर अमिताभ और उनके भाई अजिताभ भी आ गए. बोफोर्स घोटाले ने पूरे देश में तूफान ला दिया.

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चुनाव जीतने के 3 साल बाद ही अमिताभ को राजनीति से इस्तीफा देना पड़ा. साल 1987 में यह बात सामने आयी थी कि स्वीडन की हथियार कंपनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को तोपें सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिये 80 लाख डालर की दलाली चुकाई थी. स्वीडन की रेडियो ने सबसे पहले इसका खुलासा किया. बोफोर्स घोटाला सामने आने के बाद पूरे देश में बवंडर मच गया था.

यहां तक कि जब 1991 में राजीव गांधी की हत्या हुई तो गांधी परिवार ने बच्चन परिवार पर उन्हें अकेला छोड़ने का आरोप लगा दिया था. इस पर बच्चन परिवार का कहना था राजनीति में लाकर राजीव ने उन्हें बीच रास्ते छोड़ दिया था.

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एक इंटरव्यू में अमिताभ ने कहा था कि गांधी और नेहरू परिवार ने भारत के ऊपर सदियों से राज किया है. वो राजा हैं हम रंक हैं. राजा निर्धारित करेगा कि किसके साथ उसको संबंध बनाना है. किसके साथ उसको दोस्ती निभानी है. रंक नहीं. उन्होंने कहा था कि हमारा स्नेह आदर उस परिवार के साथ हमेशा रहेगा लेकिन उन्हें निर्धारित करना होगा कि इस रंक के साथ अपना रिश्ता बनाए रखना है या नहीं.

First published: 20 August 2018, 11:16 IST
 
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