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सोनिया-राहुल को झटका, नेशनल हेराल्ड केस में आयकर जांच का आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 May 2017, 15:44 IST
sonia gandhi

दिल्ली हाईकोर्ट ने यंग इंडिया कंपनी की आयकर जांच के लिए मंजूरी दे दी है. इस कंपनी में सोनिया गांधी और राजीव गांधी की हिस्सेदारी है. यंग इंडिया लिमिटेड कंपनी नेशनल हेराल्‍ड समेत तीन अखबारों का प्रकाशन करती है.

अंग्रेजी डेली नेशनल हेराल्‍ड की स्‍थापना देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी. प्रधानमंत्री बनने से पहले वह इस समाचार पत्र के संपादक रहे थे. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह भी कहा कि कंपनी सख्त रवैया नहीं अपना सकती और उसे अपने दस्तावेज आयकर विभाग को सौंपने होंगे.

आरोप है कि यंग इंडिया लिमिटेड नाम से एक कंपनी बनाई गई थी, जिसने नेशनल हेराल्ड की पब्लिशर एसोसिएटेड जरनल लिमिटेड को टेकओवर किया. इस बीच खबर है कि इस फैसले के खिलाफ गांधी परिवार सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है.

इस मामले में गांधी परिवार की तरफ से केस की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी.

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?

नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत 1938 में लखनऊ में की गई थी. इस अखबार का हिंदी अर्थ भारत का अग्रदूत था. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू इसके पहले संपादक थे.

1942 में अंग्रेजों ने भारतीय प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली, जिस वजह से अखबार को बंद करना पड़ा. 1942 से लेकर 1945 तक तीन साल के दौरान अखबार का एक भी अंक प्रकाशित नहीं हुआ.

1945 खत्म होते-होते इस अखबार को एक बार फिर से चलाने की कोशिश की गई. 1946 में इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी ने अखबार का प्रबंधन संभाला. ये वो दौर था जब मानिकोंडा चलापति राव अखबार का संपादन संभाल रहे थे.

1977 में दोबारा बंद हुआ अखबार

अखबार के दो संस्करण दिल्ली और लखनऊ से छापे जा रहे थे. 1977 में एक बार फिर से इस अखबार को बंद करना पड़ा. इंदिरा गांधी की चुनाव में हार हुई.

अब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को अखबार की कमान संभालनी पड़ी. लखनऊ संस्करण को मजबूरन बंद करना पड़ा, सिर्फ दिल्ली का अंक ही प्रकाशित हो पाता था.

एसोसिएट जर्नल्स को मालिकाना हक

खराब प्रिंटिंग और तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए साल 2008 में इसके दिल्ली अंक को भी बंद करने का फैसला किया गया. उस वक्त नेशनल हेराल्ड के संपादक थे टीवी वेंकेटाचल्लम.

2008 में इस अखबार को पूरी तरह से बंद कर दिया गया. इस अखबार का मालिकाना हक एसोसिएट जर्नल्स को दे दिया गया. इस कंपनी ने कांग्रेस से बिना ब्याज के 90 करोड़ रुपए कर्जा लिया, लेकिन अखबार फिर भी शुरू नहीं हो सका.

2012 में यंग इंडिया के हवाले

26 अप्रैल 2012 को एक बार फिर से मालिकाना हक का स्थानांतरण हुआ. अब नेशनल हेराल्ड अखबार का मालिकाना हक यंग इंडिया को मिला. यंग इंडिया में 76 फीसदी शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास हैं.

जानकारी के मुताबिक यंग इंडिया ने नेशनल हेराल्ड की संपत्ति महज 50 लाख रुपये में हासिल की. आरोप है कि इस संपत्ति की कीमत करीब 1600 करोड़ रुपये के आस-पास थी.

संपत्ति की हेरा-फेरी का आरोप

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि हेराल्ड की संपत्ति को गलत ढंग से इस्तेमाल में लिया गया है. जिसके बाद स्वामी इस मामले को साल 2012 में कोर्ट तक खींच ले गए.

पिछले कई साल से सुब्रमण्यम स्वामी इस मामले को लेकर लगातार गांधी परिवार को घेरते रहे हैं. 19 दिसंबर 2015 को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए थे.

First published: 12 May 2017, 14:42 IST
 
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