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झारखंड की गवर्नर द्रौपदी मुरमू हो सकती हैं देश की अगली राष्ट्रपति

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2017, 16:21 IST
Draupadi murmu

जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है. जहां भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ पहले दौर की बैठक कर चुकी है. वहीं विपक्षी दल भी कांग्रेस की अगुआई में अलग-अलग बैठक कर रहे हैं.

भले ही अभी स्पष्ट रूप से किसी का नाम सामने नहीं आ रहा है. मगर बीजेपी के अंदरखाने से ऐसी सूचना मिल रही है कि एनडीए राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुरमू पर दांव लगा सकता है.

बाबरी विध्वंस मामले में लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पर केस चलाए जाने के सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से इस दावे को बल मिल रहा है. बताया जा रहा है कि उनका नाम भारत के राष्ट्रपति के चुनिंदा पांच उम्मीदवारों में शामिल कर लिया गया है.

द्रौपदी का महिला और आदिवासी होना उनकी दावेदारी को मजबूत करता है. गौरतलब है कि देश के शीर्ष पद पर अभी तक कोई आदिवासी समुदाय का व्यक्ति नहीं पहुंचा है.

इस पद द्रौपदी को बैठा कर बीजेपी अपनी वाहवाही लूट सकता है. इसके साथ ही द्रौपदी के नाम पर बीजेपी को शिबु सोरेन का भी समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

द्रौपदी मुर्मू ओड़िशा की रहने वाली है. जहां पिछले 17 सालों से बीजू जनता दल की सरकार है. 2019 में ओड़िशा में विधानसभा और देश में आम चुनाव होना है. द्रौपदी को राष्ट्रपति बनाने का लाभ बीजेपी को दोनों चुनावों में मिलेगा.

द्रौपदी मुरमू की अब तक की राजनीतिक जीवन साफ-सुथरी रही है. वह भाजपा के सामाजिक जनजाति (सोशल ट्राइब) मोरचा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के तौर पर काम करती रहीं और वर्ष 2015 में उनको झारखंड का राज्यपाल बना दिया गया.

मुरमू का जन्म 20 जून, 1958 को ओड़िशा के एक आदिवासी परिवार में हुआ. रामा देवी वीमेंस कॉलेज से बीए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने ओड़िशा के राज्य सचिवालय में नौकरी की.

साल 1997 में नगर पंचायत का चुनाव जीत कर राजनीति में मुरमू ने पदार्पण किया. मुरमू 2000 से 2004 तक विधानसभा सदस्या भी रहीं. मुरमू ओड़िशा के जमीन से निकल कर राज्यपाल बनने वाली पहली नेता हैं.

प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल जुलाई में पूरा हो रहा है। नए राष्ट्रपति का चुनाव भी इसी महीने में होगा। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम ने भाजपा को बहुमत के करीब ला दिया है। अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनाने के लिए भाजपा को 10,98,882 मतों में से 5.49 लाख वोट चाहिए होगा। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास 4.57 लाख वोट हैं। मतलब बीजेपी को अभी भी 17500 इलेक्ट्रोल मतों की जरुरत पड़ेगी।

First published: 5 May 2017, 15:14 IST
 
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