Home » राजनीति » Justice AP Shah: We are told what we can or cannot eat see or speak sloganeering, flag raising have become tests for nationalism
 

पूर्व जस्टिस शाह बोले ये है नया 'राष्ट्रवाद'- क्या खाना और बोलना है, हम पर थोपा जाता है

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 April 2017, 11:26 IST

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह ने देश के वर्तमान सियासी हालात पर कड़ी टिप्पणी की है. दिल्ली के एमएन रॉय मेमोरियल लेक्टर में जस्टिस शाह ने कहा कि भारतीयों को राष्ट्रगान पर जबरन खड़ा करवाया जाता है और हमें बताया जाता है कि क्या खा सकते हैं क्या नहीं, क्या देख सकते हैं क्या नहीं और क्या बोल सकते हैं क्या नहीं.

गुरमेहर कौर के मामले में सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी में चले विवाद पर इशारों में जस्टिस एपी शाह ने कहा, "देश के शिक्षा संस्थानों पर हमला हो रहा है. किसी भी स्वतंत्र विचार को कुचलने का लगातार प्रयास होता है." 

जस्टिस शाह ने लेक्चर के दौरान कहा, "यह दुख की बात है कि अगर किसी मुद्दे पर सरकार के पक्ष में स्वीकृत विचार से अलग कोई राय रखता है तो उन्हें तुरंत राष्ट्रविरोधी या देशद्रोही ठहरा दिया जाता है. असंतुष्टि और विरोध की आवाज़ के खिलाफ आपराधिक और यहां तक कि राजद्रोह का आरोप थोपा जाता है." 

'भारत एक विविधता वाला देश'

इस दौरान जस्टिस शाह ने सावरकर और रवींद्र नाथ टैगोर के भारत के बारे में विचारों की तुलना करते हुए कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है, इसलिए लोगों को अलग-अलग विचारों का आदर करना चाहिए. 

जस्टिस शाह ने कहा, "जो राष्ट्रवाद और देशभक्ति के बारे में अलग विचार रखते हैं हमें उन विरोधाभासों का आदर करना चाहिए." साथ ही शाह ने कहा कि यह सवाल पूछना भी अहम है कि देश क्या केवल एक क्षेत्र है या यह लोगों से मिलकर बना है. शाह ने कहा कि ऐसी आवाज़ें जो वंचितों और अल्पसंख्यकों के हक की बात उठाती हैं, क्या वे इस देश के लोगों के खिलाफ है या राष्ट्रविरोधी है. 

याकूब-अफजल की फांसी पर उठाए थे सवाल

रिटायर्ड जस्टिस शाह ने साथ ही कहा, "हमारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार  कोई उपहार या विशेषाधिकार नहीं है. देश की जनता के दशकों के संघर्ष और त्याग के बाद हमने संविधान के जरिए इस हक को जीता है."

जस्टिस शाह ने साथ ही कहा कि पाकिस्तान की तरह भारत की स्थापना धर्म के आधार पर नहीं हुई है. गौरतलब है कि रिटायर्ड जस्टिस एपी शाह ने 1993 मुंबई धमाकों में याकूब मेमन और संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने इसके पीछे राजनीतिक मंशा की बात कही थी.

First published: 20 April 2017, 11:20 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी