Home » राजनीति » Kejriwal in aggressive mood after SC decision Kejriwal demanded meeting time to LG
 

SC के फैसले के बाद आक्रामक मूड में केजरीवाल, LG से मिलने का मांगा समय

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 July 2018, 14:48 IST

सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार की याचिका पर अपना फैसला देते हुए बुधवार को कहा कि दिल्ली के लेफ्टिनेंट-गवर्नर के पास कोई स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति नहीं है और उन्हें मंत्रियों की परिषद की सलाह सुननी चाहिए. इसके बाद से ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आक्रामक मूड में हैं. केजरीवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल से मिलने का समय मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली सचिवालय पर कैबिनेट की बैठक बुलाई, जिसमें सभी मंत्रियों के विभागों में लंबित पड़े कामकाज से जुड़ी फाइलों को तलब किया गया. इसके अलावा केजरीवाल ने अपने सभी विधायकों की भी बैठक बुलाई है.

सभी विधायकों को अपने काम की पेंडिंग लिस्ट लेकर पहुंचने को कहा गया है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर बताया कि सभी विभागों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरुप काम करने का निर्देश दे दिया गया है.

इससे पहले शीर्ष अदालत के फैसले के चंद घंटे के भीतर ही दिल्ली में एक बार फिर अधिकारों की लड़ाई शुरू हो गई है. कल रात ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चंद घंटे के भीतर सर्विसेज विभाग ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की भेजी गई फाइल को लौटा दिया. देर रात दिल्ली के नौकरशाह के एक वरिष्ठ अफसर ने उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आदेश पर जवाब देते हुए उसे मानने से साफ इनकार कर दिया.

पढ़ें- खुशखबरी: केजरीवाल सरकार का दिल्लीवासियों को बड़ा तोहफा, अब 500 मीटर के दायरे में मिलेगी ये सुविधा

दिल्ली के सर्विसेज डिपार्टमेंट के सचिव ने मनीष सिसोदिया का आदेश वापस लौटा दिया. यह विभाग अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग और सेवा से जुड़े मामलों को देखता है. इस विभाग ने सिसोदिया के आदेश को न मानने के पीछे दो तर्क दिए गए हैं. विभाग ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी अगस्त 2016 के नोटिफिकेशन को रद्द नहीं किया गया है और इस नोटिफिकेशन में अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार उपराज्यपाल या मुख्य सचिव के पास है.
 
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए एक अहम फैसले में कहा है कि कैबिनेट की सलाह पर ही राज्यपाल को फैसले लेने का अधिकार है. जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि सरकार को हर मामले में एलजी की इजाजत जरूरी नहीं है.

First published: 5 July 2018, 14:39 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी