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जानिए किस अभिशाप के चलते अखिलेश यादव नहीं बन सके दोबारा मुख्यमंत्री

सौरभ शर्मा | Updated on: 12 March 2017, 19:24 IST

देश के सबसे बड़े राज्य में चुनाव संपन्न होने के बाद परिणाम सामने आ गए हैं और भारतीय जनता पार्टी + ने ऐतिहासिक रूप से 325 सीटों पर कब्जा जमाया है. लेकिन भाजपा की इस जीत के पीछे की वजह ऐसी है जिसे जानकर आप चौंक जाएंगे. ऐसा नहीं है कि भाजपा ने अखिलेश यादव को हरा दिया, बल्कि यह एक अभिशाप है जो प्रदेश के हर मुख्यमंत्री के साथ जुड़ा रहा है और जिसका खामियाजा अखिलेश को भी भुगतना पड़ा.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री की कुर्सी के साथ एक ऐसा अघोषित अभिशाप जुड़ा हुआ है जिसे हर किसी को भोगना पड़ा है. अखिलेश के पिता समेत भाजपा के बड़े नेताओं को भी इसका सामना करना पड़ा था. संभावना है कि इस अभिशाप को शायद आगे भी कई नेताओं को भोगना पड़े. आइए आपको भी बताते हैं कि अखिर यूपी के सीएम की कुर्सी पर कौन सा अभिशाप है जो अभी तक नहीं धुल सका.

 

क्या है अभिशाप

यह सच है कि यहां के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आजादी से लेकर अब तक कोई भी लगातार दोबारा नहीं बैठ सका है. गोविंद वल्लभ पंत से लेकर अब तक 20 लोग 30 बार मुख्यमंत्री बने लेकिन चुनाव के बाद कोई भी दोबारा मुख्यमंत्री की शपथ लेने में सफल नहीं हो पाया.

पिछले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस अभिशाप को खत्‍म करने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे, लेकिन शनिवार को जैसे ही 17वीं विधानसभा के चुनावी नतीजे आने शुरू हुए उत्तर प्रदेश का यह अभिशाप दोबारा से जीवित हो गया. अखिलेश सरकार को करारी हार का सामना करना पड़ा.

 

कुछ ऐसा रहा है अभी तक का इतिहास

आजादी के बाद संयुक्त प्रांत उत्तर प्रदेश नाम से जाना जाने लगा. 26 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत के प्रधान गोविंद वल्लभ पंत यूपी के पहले मुख्यमंत्री बने. अब तक प्रदेश में 30 मुख्यमंत्री बन चुके हैं. मुख्यमंत्रियों की कुल संख्या 20 ही रही क्योंकि डा. संपूर्णानंद, नारायण दत्त तिवारी, मुलायम सिंह यादव और मायावती जैसे कई लोग एक से अधिक बार मुख्यमंत्री बने.

इस दौरान यूपी में 10 बार राष्ट्रपति शासन भी लगा. 3 लोग राज्य के कार्यकारी मुख्यमंत्री रहे, जिनका कार्यकाल बहुत छोटा रहा. प्रदेश में पहली विधानसभा 1952 से 1957 तक रही. इस दौरान गोविंद वल्लभ पंत मुख्यमंत्री रहे. दूसरी विधानसभा का कार्यकाल 1957 से 1962 तक रहा और इसमें सम्पूर्णानंद मुख्यमंत्री बने.

लेकिन कोई नहीं बैठा लगातार

वहीं, बाद के मुख्‍यमंत्रियों की बात करें तो चंद्रभानु गुप्ता, सुचेता कृपलानी, चंद्रभानु गुप्ता, चौधरी चरण सिंह, चंद्रभानु गुप्ता, चौधरी चरण सिंह, त्रिभुवन नारायण सिंह, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, नारायण दत्त तिवारी, राम नरेश यादव, बनारसी दास, विश्वनाथ प्रताप सिंह, श्रीपति मिश्र, नारायणदत्त तिवारी, वीर बहादुर सिंह, नारायणदत्त तिवारी, मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, मुलायम सिंह यादव, मायावती, राष्ट्रपति शासन, मायावती, कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्त, राजनाथ सिंह, मायावती, मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पद संभाला लेकिन कोई लगातार दोबारा इस कुर्सी पर नहीं बैठ सका.

First published: 12 March 2017, 19:24 IST
 
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