Home » राजनीति » Know how Ram Nath Kovind the NDA candidate is all set to become 14th President of India
 

'रायसीना हिल्स' की रेस में मोदी के 'राम' की जीत क्यों पक्की है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2017, 14:27 IST
पीएम मोदी के साथ NDA के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद/ ट्विटर

रामनाथ कोविंद को एनडीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने का एलान करके मोदी और शाह ने सियासी जानकारों को एक बार फिर हैरान कर दिया. मीडिया रिपोर्टों में झारखंड की आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू से लेकर पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल, मेट्रोमैन ई श्रीधरन और कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन जैसे कई नाम चल रहे थे. 

राष्ट्रपति चुनाव में नंबर गेम को देखते हुए रामनाथ कोविंद का चयन कितना चतुराई भरा है, इसको जानने के लिए आंकड़ों पर नज़र डालना ज़रूरी है. दरअसल राष्ट्रपति चुनाव में कुल 4,120 विधायकों के वोटों की संख्या 5,49,474 और 776 सांसदों के वोटों की संख्या 5,49,408 है. यानी विधायकों और सांसदों का कुल वोट 1,098,882 है.

राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार को 5,49,442 वोट या उससे ज़्यादा मिलने चाहिए. एनडीए के पास कुल 5 लाख 32 हजार वोट हैं. अपने प्रत्याशी को राष्ट्रपति बनाने के लिए उसे 17 हजार 442 वोट और चाहिए.

रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह.

TRS और YSR कांग्रेस का समर्थन

रामनाथ कोविंद की उम्मीदवारी के बाद आंध्र प्रदेश की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने उन्हें समर्थन देने का एलान किया है. पार्टी के पास 17 हजार 666 वोट हैं. इसके साथ ही तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने भी उन्हें समर्थन की घोषणा की है. टीआरएस के पास 22 हजार 48 वोट हैं. दोनों के मिलाकर 39,714 वोट होते हैं. 

दोनों पार्टियों के वोट एनडीए के पाले में जोड़ने पर रामनाथ कोविंद के समर्थन में 5 लाख 71 हज़ार से ज्यादा वोट हो जाते हैं. इस तरह एनडीए उम्मीदवार को 22 हज़ार अतिरिक्त वोट मिलते नज़र आ रहे हैं. वहीं उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों के लिए भी रामनाथ कोविंद का विरोध काफ़ी मुश्किल दिख रहा है.

मोदी का मास्टर कार्ड

पीएम मोदी और अमित शाह ने कोविंद को उम्मीदवार बनाकर एक और मास्टर कार्ड चला है. दलित समुदाय से आने की वजह से बसपा के लिए उनका विरोध करना आसान नहीं होगा. इसके साथ ही रामनाथ कोविंद उत्तर प्रदेश के कानपुर से ताल्लुक रखते हैं. समाजवादी पार्टी के लिए यूपी के किसी शख्स को राष्ट्रपति बनाने की राह में रोड़ा बनना मंजूर नहीं होगा.

अखिलेश यादव की पार्टी सपा के 26 हजार 60 वोट हैं, जबकि मायावती की बसपा के पास 8 हजार 200 वोट हैं. इस तरह 34000 अन्य वोट भी रामनाथ कोविंद के समर्थन में पड़ सकते हैं. पहली बार यूपी का कोई शख्स राष्ट्रपति बनने जा रहा है, ऐसे में दोनों के लिए यूपीए उम्मीदवार के पाले में जाना घाटे का सौदा हो सकता है. 

नीतीश से कोविंद के अच्छे संबंध

बात बिहार में सत्ताधारी नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड की करें, तो उसके पास 20 हजार 935 वोट हैं. एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि चूंकि बतौर बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद और नीतीश के संबंध अच्छे रहे हैं, लिहाजा उनका विरोध करना नीतीश के लिए कठिन है.

अगर सपा-बसपा और जेडीयू का वोट जोड़ दिया जाए, तो ये 55 हजार से ज्यादा होता है. इसे भी अगर एनडीए में मानकर चलें तो कोविंद का आंकड़ा 6,25,000 के पार जा सकता है. शिवसेना के पास 25,893 वोट हैं. लेकिन पार्टी पिछले दो चुनाव से एनडीए के बजाए यूपीए उम्मीदवार का समर्थन कर रही है. इस बार भी उसने एमएस स्वामीनाथन को उम्मीदवार बनाने को कहा था. आंकड़ों को देखते हुए शिवसेना अगर विरोध भी करती है, तो रामनाथ कोविंद को कोई दिक्कत नहीं आएगी.

बीजेडी-अन्नाद्रमुक भी साथ 

ओडिशा में बीजू जनता दल के पास 36,500 वोट हैं. राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोमवार को ही रामनाथ कोविंद के समर्थन का एलान कर दिया. अपने ट्वीट में पटनायक ने लिखा, "भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के लिए हम रामनाथ कोविंद का समर्थन करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझसे उनकी उम्मीदवारी के बारे में बात करते हुए समर्थन मांगा है." 

एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद.

तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के पास 59,000 वोट हैं. अन्नाद्रमुक भी एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करने जा रही है. ऐसे में रायसीना हिल्स की रेस में 'मोदी के राम' यानी रामनाथ कोविंद चुनाव से पहले ही सबसे आगे नज़र आ रहे हैं. वोटों का गणित उनके पक्ष में साफ़ झुकता दिख रहा है. यानी देश के 14वें राष्ट्रपति के चुनाव में रामनाथ कोविंद की जीत तकरीबन पक्की है.

www.politicalbaba.com
First published: 20 June 2017, 14:08 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी