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नजीब जंग ने भले ही इस्तीफा दिया हो लेकिन इसके पीछे कई किंतु-परंतु हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 December 2016, 8:32 IST
(गेट्टी इमेजेज़)

22 दिसंबर की शाम दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने लगभग सबको चौंकाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इस बारे में कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन उनके नजदीकी लोग और खुद उन्होंने बताया है कि वे पठन-पाठन के क्षेत्र में लौटना चाहते हैं.

दिल्ली के लेफ्टिनेंट गर्वनर का पद संभालने वाले नजीब जंग का बीते काफी समय से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ टकराव चल रहा था. 1973 बैच के आइएएस अधिकारी नजीब जंग मध्य प्रदेश कैडर से ताल्लुक रखते थे. उन्होंने बतौर आईएएस अधिकारी  डीएम, पब्लिक सेक्टर कंपनी के प्रबंध निदेशक व संयुक्त सचिव का पद संभाला है. 1999 में उन्होंने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संयुक्त सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया.

जंग ने एशियन डेवलपमेंट बैंक के निदेशक और रिलांयस के प्रभुत्व वाली ऑब्जर्बर रिसर्च फाउंडेशन में भी काम किया

इसके बाद जंग ने एशियन डेवलपमेंट बैंक में एनर्जी रिसर्च के निदेशक और रिलांयस के प्रभुत्व वाली ऑब्जर्बर रिसर्च फाउंडेशन में भी काम किया. केंद्र सरकार के साथ उन्होंने अच्छे रिश्ते बनाए रखा जबकि दिल्ली के उपराज्यपाल के तौर पर उनकी नियुक्ति पूर्व की कांग्रेसनीत यूपीए सरकार द्वारा की गई थी. उन्होंने लगातार दिल्ली की आम आदमी पार्टी के साथ टकराव का रास्ता अपनाया.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में एमए करने वाले नजीब जंग ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से 'सोशल पॉलिसी और प्लानिंग इन डेवलपिंग कंट्रीज' में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. एशियन डेवलेपमेंट बैंक में 7 सालों तक एनर्जी (सीनियर एडवाइजर) रहे. ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट में भी नजीब जंग सीनियर विजीटिंग फैलो रह चुके हैं. साल 2009 में जंग ने जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में कुलपति का पद संभाला था. इसके अलावा उनका अकादमिक दुनिया से कोई खास नाता नहीं रहा है.

नजीब जंग देश-विदेश के के पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेख लिखते रहे हैं. उनकी पहचान ऊर्जा मामलों के जानकार के रूप में होती है. जंग ने तेजिंदर खन्ना के बाद दिल्ली के उपराज्यापल का पद संभाला था. नजीब जंग के परिजन भी कई महत्वपूर्ण पदों को संभाल चुके हैं. नजीब जंग के दादा हैदराबाद निजाम के राज में चीफ इंजीनियर व चीफ जस्टिस के पद पर थे. नजीब जंग के परदादा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सह संस्थापकों में थे.

नजीब-केजरीवाल की ऐतिहासिक जंग

दिल्ली की आम आदमी पार्टी के साथ उनका टकराव बेहद चर्चा में रहा है. यहां हम जंग की केजरीवाल से टकराव की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं.

1. केजरीवाल के साथ उनके टकराव के चलते एक समय दिल्ली में एक साथ दो एसीबी के प्रमुख बन गए थे. अरविंद केजरीवाल सरकार ने एसएस यादव को और जंग ने मुकेश मीणा को एसीबी के मुखिया के रूप में नियुक्त किया था. हालांकि, बाद में यह विवाद सुलझ गया था.

2. दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की नियुक्ति भी विवादों में रही. 15 जुलाई को उनकी ज्वाइनिंग होनी थी लेकिन, 29 जुलाई तक वे कार्यभार नहीं संभाल सकीं. इसकी वजह भी नजीब जंग और केजरीवाल के बीच जारी तकरार ही थी.

जंग का कहना था कि मालीवाल की नियुक्ति पर केजरीवाल ने उनसे सहमति नहीं ली थी. जबकि केजरीवाल ने इस मामले में उन पर केंद्र के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था.

3. दिल्ली में टैक्स कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर भी दोनों का टकराव हुआ. केजरीवाल ने विजय कुमार को टैक्स कमिश्नर नियुक्त किया और नजीब जंग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेशों का हवाला देकर उनको अधिकार मुक्त कर दिया था.

4. दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (डीईआरसी) के चेयरमैन के तौर पर केजरीवाल सरकार ने कृष्णा सैनी को नियुक्त किया था. नजीब जंग ने उन्हें पद से हटा दिया. उनका तर्क था कि यह नियुक्ति वाजिब नहीं है और नियमों को ताक पर रखकर हुई है.

5. जंग और केजरीवाल की जंग कोर्ट तक जा पहुंचा था. दिल्ली हाईकोर्ट ने अगस्त में एक टिप्पणी में एलजी को दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख बताया था. इसे केजरीवाल सरकार के लिए झटका माना गया. केजरीवाल ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए एलजी के अधिकारों की व्याख्या की. इस मामले में फैसला अभी लंबित है.

6. दिल्ली के कार्यकारी मुख्य सचिव के रूप में शकुंतला गामलिन की नियुक्ति पर भी नजीब जंग और केजरीवाल टकरा गए. केजरीवाल के मना करने के बावजूद गामलिन ने चार्ज ले लिया था. इस पर दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार पर उपराज्यपाल के जरिए राज्य सरकार का 'तख्तापलट' करने का आरोप लगाया था.

7. नजीब जंग ने हेल्थ सर्विसेज के डायरेक्टर जनरल और आम आदमी पार्टी के फ्लैगशिप प्रॉजेक्ट ‘मोहल्ला क्लीनिक’ के प्रभारी तरुण सीम को अपने पद से हटा दिया था. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने इसे दुखद और गंदी राजनीति का हिस्सा बताया था.

8. इसी साल जुलाई में आॅटो-टैक्सी हड़ताल के बाद भी अरविंद केजरीवाल ने नजीब जंग को सवालों के कठघरे में खड़ा किया. केजरीवाल का आरोप था कि बीजेपी की दिल्ली में अव्यवस्था फैलाने की साजिश में एलजी मदद कर रहे हैं.

9. सीएम केजरीवाल ने दिल्ली महिला आयोग में आईएएस दिलराज कौर की नियुक्ति को रद्द कर दिया. जंग ने शुंगलू कमेटी का भी गठन किया था ताकि सरकार की अनियमितताओं की जांच हो सके. यह कमेटी अपनी रिपोर्ट उपराज्यपाल को सौंप चुकी है.

10. अरविंद केजरीवाल ने बार-बार ट्वीट कर नजीब जंग पर मोदी के लिए काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने कुछ ही दिन पहले एक ट्वीट में कहा- 'आप (नजीब जंग) पीएम मोदी के इशारे पर कितना भी असंवैधानिक, गैर कानूनी काम कर लें लेकिन मोदी कभी आपको उपराष्ट्रपति नहीं बनाएंगे.'

First published: 23 December 2016, 8:32 IST
 
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