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'हमारी प्रेरणा, देश के सबसे बड़े नेताओं में से एक आडवाणी जी को शुभकामनाएं'

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 November 2016, 11:33 IST
(ट्विटर)

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी आज 89 साल के हो गए. इस मौके पर सियासी हलकों में उनको शुभकामनाएं देने का सिलसिला जारी है. पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी वरिष्ठ भाजपा नेता को जन्मदिन की बधाई दी है.

पीएम मोदी ने दिल्ली में लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर पहुंचकर शुभकामनाएं दीं. इस दौरान अमित शाह भी मौजूद रहे. इससे पहले पीएम मोदी ने ट्वीट किया, "हमारी प्रेरणा, देश के सबसे बड़े नेताओं में से एक, बिना थके और कर्मठतापूर्वक देश की सेवा करने वाले श्री एलके आडवाणी जी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं."

पीएम मोदी ने एक और ट्वीट में लिखा, "मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आडवाणी जी को स्वस्थ जीवन और दीर्घायु प्रदान करें."

ट्विटर

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी आडवाणी को शुभकामनाएं देते हुए ट्वीट में लिखा, "आदरणीय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं. ईश्वर आपको स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करे."

बीजेपी के पितामह

आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को अविभाजित भारत के कराची शहर में हुआ था. कमला आडवाणी से उनकी शादी 1965 में हुई. हालांकि उनकी बेटी प्रतिभा और बेटे जयंत सियासत में सक्रिय नहीं है.

आडवाणी की बहुत से लोग इस बात के लिए तारीफ करते हैं कि उन्होंने राजनीति में वंशवाद की परिपाटी को आगे नहीं बढ़ाया. वर्ष 1951 में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जनसंघ की स्थापना से लेकर 1980 में भाजपा की स्थापना तक आडवाणी आजाद भारत की हर बड़ी सियासी घटना के गवाह रहे हैं.

1957 तक वे जनसंघ के सचिव रहे. 1973 से 1977 तक आडवाणी ने भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष का दायित्व भी संभाला. 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद से 1986 तक आडवाणी पार्टी के महासचिव रहे. 

राम मंदिर आंदोलन

1986 से 1991 तक पार्टी के अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व भी आडवाणी ने संभाला. आडवाणी को मंदिर आंदोलन को उभार देने का प्रमुख सूत्रधार माना जाता है.

1990 में जब राम मंदिर आंदोलन चरम पर था, तभी आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली. गिरफ़्तारी के बाद आडवाणी का राजनीतिक कद काफी बड़ा हो गया. 

छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जिन लोगों को अभियुक्त बनाया गया, उनमें आडवाणी का नाम भी शामिल है. आडवाणी तीन बार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं.

वाजपेयी के साथ जोड़ी

अभी वो गुजरात के गांधीनगर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के सांसद हैं. 1977 से 1979 तक जनता सरकार के कार्यकाल में लालकृष्ण आडवाणी ने सूचना प्रसारण मंत्रालय का कार्यभार संभाला.

एनडीए शासनकाल में वह उपप्रधानमंत्री भी रहे. 1999 में एनडीए की सरकार दोबारा बनने पर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह केंद्रीय गृहमंत्री बने. इसी सरकार में उन्हें 29 जून 2002 को उपप्रधानमंत्री पद का दायित्व भी सौंपा गया.

हालांकि जिन्ना को लेकर उनके बयान पर काफी बवाल मचा. यहां तक कि उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी छोड़ना पड़ा. बीजेपी के लौहपुरुष के रूप में भी उनको गिना जाता है.

मोदी की उम्मीदवारी का विरोध

2013 में नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव अभियान के लिए भाजपा प्रचार समिति का प्रमुख और फिर पीएम उम्मीदवार बनाने पर आडवाणी की नाराजगी जगजाहिर रही.

माना जाता है कि आडवाणी खुद के या फिर सुषमा स्वराज को आगे करने के पक्ष में थे, लेकिन उनकी मंशा पूरी नहीं हो सकी. सियासी जानकारों के मुताबिक आरएसएस के दबाव में बीजेपी ने मोदी को आगे किया.

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत वरिष्ठ नेताओं को अपने मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया. पार्टी में हाशिए पर चले जाने का दर्द कभी-कभी आडवाणी की जुबान पर छलक आता है. कभी-कभी उनका ब्लॉग भी सियासी चर्चा का विषय बन जाता है.

एक बार उन्होंने इमरजेंसी के खतरे को लेकर आशंकाएं जाहिर की थीं, जिसे पीएम मोदी पर उनका अपरोक्ष हमला माना गया. वैसे सियासी जानकार कहते हैं कि मोदी आडवाणी को ही अपना सियासी गुरु मानते रहे हैं.

First published: 8 November 2016, 11:33 IST
 
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