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उत्तराखंड: कई दिग्गज नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस तय नहीं कर पा रही उम्मीदवार

न्यूज एजेंसी | Updated on: 11 March 2019, 15:32 IST

उत्तराखंड में 2014 लोकसभा चुनाव में सभी पांच सीट हारने वाली कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि पहाड़ी राज्य में 11 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए सभी पांच उम्मीदवारों के चयन पर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान लेगा. प्रदेश कांग्रेस समिति (पीसीसी) के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने यहां कहा, "राज्य कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हो चुकी है और अब पार्टी हाईकमान द्वारा अंतिम फैसला लिया जाएगा."

संभावित उम्मीदवारों के रूप में कितने लोगों को चुना गया है, इस पर प्रीतम सिंह ने कुछ कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "मैं इससे ज्यादा कुछ भी खुलासा नहीं कर सकता." कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि सतपाल महाराज और विजय बहुगुणा जैसे शीर्ष नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस सही उम्मीदवारों के चयन को लेकर पसोपेश में है.

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस बार चुनाव लड़ने को इच्छुक हैं लेकिन उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि वे किस सीट से चुनाव लड़ेंगे. रावत के एक करीबी सूत्र ने कहा, "वह अंतिम वक्त तक सस्पेंस बरकरार रखेंगे."

इसी तरह, पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष किशोर उपाध्याय टिहरी से चुनाव लड़ना चाहते हैं. उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार शुरू कर दिया है. प्रीतम सिंह भी टिहरी से चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे हैं.

कांग्रेस अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा को फिर से उम्मीदवार बना सकती है. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "हालांकि टम्टा 2014 में हार गए थे लेकिम हम फिर भी मानते हैं कि वह अल्मोड़ा के एक मजबूत उम्मीदवार हैं." नैनीताल, पौड़ी और हरिद्वार सीट के लिए उम्मीदवारों पर सस्पेंस बरकरार है.

प्रीतम सिंह ने कहा, "पार्टी के सभी पांच उम्मीदवारों के नाम का खुलासा जल्द ही किया जाएगा." उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जी के सक्षम नेतृत्व के अंतर्गत हम सभी एकजुट हैं और इस बार शानदार प्रदर्शन देंगे." पहाड़ी राज्य की सभी पांच सीटों पर मतदान 11 अप्रैल को होगा.

चुनाव में पार्टी किन-किन मुद्दों को उठाएगी, इस पर प्रीतम सिंह ने कहा कि चुनाव राष्ट्रीय व राज्य मुद्दों, दोनों पर लड़ा जाएगा. उन्होंने कहा, "राज्य सरकार का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है. यह निश्चित रूप से एक मुद्दा है. लेकिन इस दौर में आतंकवाद, गैस की बढ़ती कीमतें और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दे भी हैं."

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First published: 11 March 2019, 15:32 IST
 
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