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लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में बने दो धड़े ! एक मायावती तो दूसरा ममता बनर्जी के साथ

आदित्य साहू | Updated on: 28 July 2018, 13:16 IST

लोकसभा 2019 के चुनाव के लिए महागठबंधन बना भी नहीं था इससे पहले ही उसके दो धड़े में बंटने की खबर सामने आ रही है. इसमें एक धड़ा यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की तरफ झुक रहा है तो दूसरा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर जाता दिखाई दे रहा है.

इसकी बानगी तब देखने को मिली जब 26 जुलाई को एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने नई दिल्ली में यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से मुलाकात की और वहीं दूसरी तरफ 27 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की.

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उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद ममता ने कहा कि अगले लोकसभा चुनाव के लिए बन रहे संभावित गठबंधन से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम नहीं होना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो क्षेत्रीय पार्टियों की एकता विभाजित हो जाएगी. ममता ने ये ऐसे ही नहीं कहा. दरअसल वह यूपी की महत्ता को अच्छे से जानती हैं.

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ममता को यह भी अहसास है कि लोकसभा की 80 सीटों वाले यूपी से आने वाली मायावती की नजदीकियां कांग्रेस से बढ़ती जा रही हैं. सपा सुप्रीमो अखिलेश ने भी कहा है कि वह भाजपा को रोकने के लिए यूपी में बीएसपी को ज्यादा सीटें देने को तैयार हैं. इसके अलावा बीएसपी का कांग्रेस के अलावा कई राज्यों में अन्य पार्टियों से भी गठबंधन है.

ऐसे में अगर देशभर में बीएसपी 80-100 सीटें लेकर भी आती है तो मायावती के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बढ़ जाएगी. वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं. ऐसे में ममता बनर्जी अपनी चिर प्रतिद्वंदी लेफ्ट पार्टियों से गठबंधन करके भी 42 से ज्यादा लोकसभा सीटें नहीं जीत सकतीं.

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पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी के सूत्रों ने भी कहा था कि बीजेपी को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए वे किसी भी नेता (जिसके पीछे आरएसएस नहीं हो) को प्रधानमंत्री बनाने में परहेज नहीं करेंगे. कांग्रेस ममता बनर्जी या मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का दांव चल सकती है. यह तो सभी जानते हैं कि विपक्षी दलों की एकजुटता में देरी होने की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी है. टीएमसी, समाजवादी पार्टी , नेशनल कांफ्रेंस और बहुजन समाज पार्टी समेत कई क्षेत्रीय दल पीएम उम्मीदवारी पर अभी चुप हैं.

First published: 28 July 2018, 13:14 IST
 
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