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अस्थिरता के नाम पर केंद्र यूपी में लगा सकती है राष्ट्रपति शासन

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 January 2017, 16:09 IST
(कैच)

उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह के परिवार में मचे घमासान और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के द्वारा पार्टी पर अपना प्रभुत्व जमा लेने के घटनाक्रम में केंद्र भी सतर्क निगाहों से यूपी के राजनीतिक उठापटक का विश्लेषण करने में लगा हुआ है.

सपा की विशेष कार्यकारिणी की बैठक में सीएम अखिलेश यादव ने पिता को गद्दी से उतार कर संरक्षक बनाया और खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गये. यूपी में हुए इस राजनीतिक बदलाव से दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है.

अखिलेश के इस कदम को राजनीति के माहिर जानकार मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं, वहीं इससे होने वाले नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है.

विशेषज्ञों की राय में इस कदम के बाद सपा दो फाड़ हो गई है. एक अखिलेश का गुट, जिसके पास पार्टी के सदस्यों का बहुमत है, वहीं दूसरा गुट शिवपाल के साथ. शिवपाल के गुट में महज 10 से 15 विधायक होने का अनुमान है.

इसके मद्देनजर संभावना जताई जा रही है कि यदि शिवपाल का गुट बगावत करता है तो चुनाव आयोग आगामी विधानसभा चुनाव में सपा के चुनाव निशान 'साइकिल' को सीज कर सकता है.

वहीं अगर अखिलेश द्वारा इस्तीफा देने या शिवपाल गुट द्वारा समर्थन वापसी का कदम उठाया जाता है तो इस स्थिति का पूरा लाभ केंद्र सरकार उठाने की कोशिश करेगी और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगया जा सकता है.

कयास इस तरह के भी लगाये जा रहे हैं कि राष्ट्रपति शासन में यूपी के चुनाव कुछ दिन टाले जा सकते हैं. आज के घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग असल में समाजवादी पार्टी किसकी है, इस पर फैसला करेगी और इससे संबंधित रिकॉर्ड को भी तलब कर सकती है.

पार्टी के नियम कानून और संविधान के अनुसार औऱ चुनाव आयोग में दर्ज जानकारी के अनुसार मुलायम सिंह यादव ही अभी भी सपा के अध्यक्ष हैं. अब जब अखिलेश गुट दावा करेगा तो उसके बाद चुनाव आयोग नियमों की कसौटी पर उनके दावे को कसेगा.

पार्टी में किसका दावा बनता है, उसके लिए एक प्रक्रिया निर्धारित है. पार्टी के जो विधायक हैं, सांसद हैं, हारे हुए उम्मीदवार हैं, उनकी राय लेने आदि की एक निश्चित प्रक्रिया है.

अगर यह विवाद लंबा खिंचता है तो चुनाव आयोग समाजवादी पार्टी के चुनाव निशान 'साइकिल' को सीज करने का अधिकार रखता है. ऐसा इसलिए कि इतनी जल्दी इसका निर्णय नहीं हो पाएगा.

इस पूरे मसले में संभावना जताई जा रही है कि पहले चुनाव आयोग नोटिस जारी करेगा, फिर सुनवाई करेगा, तय करेगा. जिसमें काफी समय लगेगा.

चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ भी दूसरा गुट हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जा सकता हैं. एक लंबी प्रकिया है. जाहिर है तब तक विधानसभा चुनाव समाप्त हो चुके होंगे.

एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि अखिलेश यादव मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे सकते हैं और राज्यपाल राम नाइक से खुद को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो गेंद गवर्नर और केंद्र के पाले में होगी.

First published: 1 January 2017, 16:09 IST
 
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