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सुनिए मायावती और नसीमुद्दीन की बातचीत के 7 ऑडियो टेप

अतुल चंद्रा | Updated on: 12 May 2017, 10:04 IST
नसीमुद्दीन सिद्दीकी और मायावती/ फाइल फोटो

एक के बाद एक कुछ वरिष्ठ बसपा नेताओं के इस्तीफे और उनके मायावती पर यह आरोप लगाने के बाद कि उन्होंने पार्टी के टिकट और पद करोड़ों रुपये लेकर बेचे हैं, मायावती को अब नसीमुद्दीन सिद्दीकी में एक सही टक्कर का आदमी मिला है. सिद्दीकी ने मायावती पर न केवल यह आरोप लगाया है कि उन्होंने उनसे 50 करोड़ रुपये मांगे, बल्कि साथ ही अपनी बात के समर्थन में कुछ-कुछ सबूत भी पेश किए.

मायावती से बातचीत को पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड करते आ रहे सिद्दीकी ने अब यह भी कहा कि मायावती और सतीश मिश्रा बसपा को खत्म करने साजिश रच रहे हैं, जिससे मायावती का नाम अकेली दलित नेता के रूप में इतिहास में दर्ज हो सके जो कि तीन बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं. 

'मायावती के पास एक पूरी गैंग'

स्वर्गीय अखिलेश दास, स्वामी प्रसाद मौर्य, आरके चौधरी और राष्ट्रीय सचिव परमदेव सभी ने यह आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी कि मायावती की पैसे की अत्यधिक मांगें पूरी नहीं की जा सकतीं. इनमें से कोई भी नेता आरोपों से आगे नहीं बढ़ा. पर नसीमुद्दीन के साथ ऐसा नहीं हुआ.

नसीमुद्दीन ने कहा कि उनके पास मायावती और उनके बीच बातचीत के लगभग 150 टेप हैं, जिनमें से एक में तो उन्हें किसी के मर्डर का षड्यंत्र रचते देखा जा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मायावती के पास एक पूरी गैंग है, जो उनके इशारे पर किसी को जान से मार सकती है अथवा किसी आगजनी को अंजाम दे सकते हैं. 

'चुनाव के तुरंत बाद मांगे 50 करोड़'

नसीमुद्दीन ने इस षड्यंत्र का टेप जारी करने से यह कहते हुए मना कर दिया कि वे उसे सही समय पर जारी करेंगे. पूर्व कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी के घर पर बसपा के गुंडों ने जिस आगजनी की वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें एक आईपीएस अधिकारी का भी हाथ था, से सिद्दीकी के आरोपों की पुष्टि होती है.

सिद्दीकी ने दावा किया कि वे आय से अधिक संपत्ति वाले मामले में 2012 में बरी हो चुके हैं. लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि उनसे पैसे की यह मांग पार्टी के दिल्ली कार्यालय में चुनाव के तुरंत बाद की गई थी. सिद्दीकी ने कहा कि जब उन्होंने इतने पैसे देने में असमर्थता जाहिर की तो मायावती ने उनसे कहा कि वे अपनी सारी जायदाद बेचकर पैसे का इंतजाम करें. सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने इसके बाद भी हां कहा, हालांकि डिमोनेटाइजेशन के कारण इसकी वन चौथाई राशि भी जमा करना मुश्किल था.

 

7 ऑडियो टैप किए जारी

सिद्दीकी ने इस मौके पर जिन 7 ऑडियो टैप्स को मीडिया के सामने चलाने के बाद जारी किया, जिसमें से एक में मायावती कथित रूप से सिद्दीकी पर “काम” (पैसे उगाहने का) को तुरंत करने पर दबाव डालते हुए सुनी जा सकती हैं. लेकिन इसमें न तो धनराशि की चर्चा है और न ही अचल संपत्ति की बिक्री की.

अपने ही विश्वसनीय सहयोगी द्वारा बातचीत की रिकॉर्डिंग किए जाने से अनजान मायावती एक टैप में सिद्दीकी को कथित रूप से सावधान करते हुए सुनी जा सकती हैं, कि इस बारे में ज्यादा बात मत करो क्योंकि उनके फोन टैप किए जा रहे हैं.

मायावती फोन पर क्या कहा जा रहा है इस बारे में कितना सतर्क थीं इसका अंदाजा इससे लग सकता है कि वे एक फोन को उस समय तुरंत काट देती हैं जब सिद्दीकी उन्हें याद दिलाते हैं कि एक बार उन्हें किस तरह से टॉर्चर किया गया था. सिद्दीकी ने खुद इस बारे में कोई ब्योरा नहीं दिया पर बातचीत से स्पष्ट है कि सिद्दीकी मायावती से अकेले में मिलने से बचना चाह रहे हैं जबकि मायावती इस पर जोर दे रही हैं.

 

बसपा का एकमात्र मुस्लिम चेहरा जिसे बुधवार को पार्टी से निकाल दिया गया, ने कहा कि मायावती ने सिर्फ मुस्लिमों के लिए ही अपमानजनक शब्द नहीं कहे वरन् उन्होंने एक मीटिंग में कांशीराम को भी इस कारण अप्रिय शब्द कहे थे कि वे पंजाब के चुनावों में नहीं जीत सके.

मायावती इस बात से परेशान थीं कि मुस्लिमों ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया और इनको कितना भी समझाने की कोशिश की जाए वे इस बात को मानने को तैयार नहीं थीं कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के कारण मुस्लिमों का वोट बंट गया था. गुस्से में मायावती ने मुस्लिमों को अपमानजनक शब्द कहे और नसीमुद्दीन पर दोष रखा कि वे मुस्लिम वोटरों को मोबलाइज करने में असमर्थ रहे.

बसपा से राज्यसभा सदस्य सतीशचंद्र मिश्रा के इस आरोप के जवाब में कि उन्होंने लोगों से काम कराने का वादा करके पैसे लिए और उनके पश्चिमी यूरोप में दो अवैध बूचड़खाने हैं, के जवाब में सिद्दीकी ने मिश्रा को चुनौती दी कि वे किसी एक बूचड़खाने का नाम बताएं अथवा किसी एक व्यक्ति का नाम बताएं जिससे उन्होंने पैसे लिए हों.

एक कथित बातचीत में मायावती सिर्फ उन टिकट पाने वाले लोगों से आए उस पैसे के बारे में चिंतित दिख रही हैं जोकि उनके द्वारा चलाए गए सदस्यता अभियान के माध्यम से जुटाया जाना था. मायावती से मिलती जुलती एक आवाज में यह सुना जा सकता है कि "मैं रसीद बुक वापस चाहती हूं."

उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में सिद्दीकी ने कहा कि ये आरोप कुछ ऐसे ही हैं कि आग पर चढ़ी केतली को काला कहना. सिद्दीकी ने दावा किया, "ताज कॉरिडोर केस में मुझे सीबीआई से क्लीन चिट मिल गई जबकि मायावती को आरोपों का सामना करना पड़ा."

पार्टी के राष्ट्रीय सचिव परमदेव ने कहा था कि बसपा एक किराना की दुकान है जहां पैसे देकर पार्टी में पद से लेकर टिकट कुछ भी खरीदा जा सकता है.

First published: 12 May 2017, 9:51 IST
 
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