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अलगाववादी नेता यासीन मलिक को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए : महबूबा मुफ़्ती

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 April 2019, 7:23 IST

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने यासीन मलिक को 24 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. तिहाड़ जेल अधिकारियों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मलिक को पेश करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने डिफेंस काउंसिल इस पर से जवाब मांगा है.

दूसरी ओर जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ़्ती का कहना है ''यासीन मलिक को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए, उनकी हालत सह में ठीक नहीं है. उन्होंने कहा जमात ऐ इस्लामी को अन्य सदस्यों को भी रिहा किया जाना चाहिए. महबूबा ने कहा साध्वी प्रज्ञा जिनपर कई गंभीर मामले है उन्हें खुली छूट है''.

 

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक को 24 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वह जम्मू और कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादी समूहों के वित्तपोषण से संबंधित एक मामले में गिरफ्तार किये गए हैं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश सयाल ने भी सुरक्षा चिंताओं के कारण वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मलिक को पेश करने की मांग करने वाले तिहाड़ जेल अधिकारियों की याचिका पर बचाव पक्ष के वकील से जवाब मांगा.

अदालत ने मलिक को एनआईए की हिरासत में भेज दिया था. कश्मीर की एक अदालत द्वारा राष्ट्रीय जांच एजेंसी को उसकी ट्रांजिट रिमांड मंजूर करने के बाद उन्हें दिल्ली लाया गया था. जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने तीन दशक पुराने मामलों को फिर से खोलने के लिए सीबीआई की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है जिसमें मलिक एक आरोपी थे.

जेकेएलएफ प्रमुख पर 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबैया सईद का अपहरण करने और 1990 में चार भारतीय वायु सेना के कर्मियों की हत्या के आरोप में अपहरण और हत्या का आरोप है.
जेकेएलएफ को हाल ही में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया गया था.

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First published: 24 April 2019, 15:55 IST
 
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