Home » राजनीति » modi govt Withdraw Support for Jamia Millia Islamia’s university Minority Status.
 

मोदी सरकार: जामिया मिलिया इस्लामिया नहीं है अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 August 2017, 17:32 IST

केंद्र सरकार ने नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को वापस लेने का फैसला किया है. मानव संसाधन मंत्रालय इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट में नया एफिडेविट दाख़िल करने वाला है, जिसमें लिखा जाएगा कि जामिया को अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाना एक ग़लती थी.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक एचआरडी मंत्रालय अब अदालत को यह भी बताएगा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया का उद्देश्य कभी भी अल्पसंख्यक संस्था नहीं था, क्योंकि इसे संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था और केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाता है.

गौरतलब हे कि 22 फरवरी 2011 में तत्कालीन यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) ने अपने आदेश में कहा था कि यह एक अल्पसंख्यक संस्थान है.

दरअसल जब 2016 में मानव संसाधन संसाधन का जिम्मा स्मृति ईरानी के पास था तब तत्कालीन एटॉर्नी जनरल रहे मुकुल रोहतगी ने मंत्रालय से कहा था कि दिल्ली का जामिया मिल्लिया इस्लामिया कोई अल्पसंख्यक संगठन नहीं है. क्योंकि इसकी स्थापना संसद के एक अधिनियम से हुई है. अटार्नी जनरल ने एचआरडी मंत्रालय को सलाह दी थी कि  यह अदालत में अपना विचार बदलना और अल्पसख्यक दर्जे के खिलाफ खड़े होने का हक रखता है.

जेएमआई पर की गईं रिट याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हैं और सरकार इस संबंध में अब नए हलफनामे दाखिल करेगी. जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की.

First published: 7 August 2017, 17:32 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी