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'गोरक्षा पर मोदी शिकार और शिकारी दोनों का पक्ष ले रहे हैं'

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 July 2017, 12:19 IST

ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने गोरक्षकों द्वारा की गई हिंसा पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया को 'पाखंडपूर्ण बयानबाजी' करार देते हुए कहा कि वह शिकार का भी पक्ष ले रहे हैं और शिकारी का भी (रनिंग विद द हेयर एंड हंटिंग विद द हाउंड्स).

संघ परिवार द्वारा संरक्षित स्वयंभू गोरक्षकों द्वारा की गई बर्बर हिंसा' की निंदा के नाम पर 'कोरी पाखंडपूर्ण बयानबाजी' के लिए मोदी की निंदा करते हुए एआईकेएस ने कहा कि जब गोरक्षा के नाम पर लोगों की पीट-पीटकर हत्या की घटनाएं लगातार घट रही थीं, तब उन्होंने चुप्पी साध रखी थी.

सभा ने एक बयान में कहा, "हमलों में शामिल लोगों का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा संघ परिवार से जुड़े होने का खुलासा भी समय-समय पर होता रहा है. लेकिन, अभी तक अपराध के साजिशकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है." बयान के मुताबिक, "दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय हमलों के पीड़ितों पर ही बेबुनियाद आरोप लगाकर, उन पर मामले दर्ज कर उनका उत्पीड़न किया गया."

किसान सभा ने मोदी से 'पाखंड बंद करने, बर्बर गोरक्षा समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा हमलों के पीड़ितों को मुआवजा देने की अपील की. सभा ने मोदी के उस दावे की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा है कि गाय के साथ माता जैसा व्यवहार होता है.

बयान के मुताबिक, "लोग अपने विश्वास व राय के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन प्रधानमंत्री वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए संवैधानिक तौर पर बंधे हैं. उन्हें इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए." 

किसान सभा ने कहा कि पंचगव्य पर वैज्ञानिक मान्यता व शोध के लिए एक समिति के गठन का मकसद अपने लोगों को नौकरियां प्रदान करना तथा अपने विचार लोगों पर थोपना है. समिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)-विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े लोग भरे हैं और इसमें सरकारी विभागों, भारतीय प्रौैद्योगिकी संस्थान, दिल्ली तथा शोध संस्थानों को शामिल करने की बात की गई है.

किसान सभा ने मोदी सरकार पर समाज में सांप्रदायिकता फैलाने का प्रयास करने तथा मवेशी व्यापार को प्रतिबंधित करने को लेकर एक अधिसूचना जारी कर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है.

First published: 18 July 2017, 12:19 IST
 
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