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मुलायम सिंह को हटाकर अखिलेश बने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अमर सिंह पार्टी से बाहर

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 January 2017, 12:48 IST

यूपी के सबसे बड़े सियासी परिवार में मची रार आज अपने चरम पर पहुंच गई. सीएम अखिलेश यादव ने आपातकालीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अधिवेशन में सदस्यों के भारी समर्थन के साथ पिता मुलायम सिंह को गद्दी से उतार कर खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गये हैं.

इसके साथ ही विशेष कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के महासचिव अमर सिंह को भी सपा से निष्कासित कर दिया गया है. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बार-बार परिवार में मचे इस घमासान के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार बताया था.

इसी के साथ समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के एक और केंद्र रहे शिवपाल यादव को भी प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक आने वाले समय में शिवपाल को भी पार्टी से निकाला जा सकता है.

इस मामले में जानकारी देते हुए पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक में आम सहमती से अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया है और साथ ही शिवपाल यादव को यूपी सपा के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है.

इससे पूर्व शनिवार को लग रहा था कि समाजवादी पार्टी की कलह शांत हो जाएगी और दोनों पक्षों के बीच कोई बीच का रास्ता निकल जाएगा. पर ऐसा नहीं हुआ. शनिवार को चौबीस घंटे के भीतर ही पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह ने सीएम अखिलेश यादव और पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव के निष्कासन को रद्द कर दिया था.

रविवार को सियासी पंडितों की गणित उस समय फेल हो गई जब रामगोपाल यादव के लिखे पत्र के आधार पर  लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को मुलायम सिंह ने असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया था.

सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने बैठक को रद्द किये जाने के बाबत बाकायदा लेटर भी जारी किया है. मुलायम ने सपा कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इस बैठक में शामिल न हों औऱ किसी भी लेटर या प्रस्ताव पर दस्तखत न करें.

क्या कहता पार्टी संविधान

इस मामले में सियासी जानकार बताते हैं कि पार्टी की विशेष कार्यकारिणी की बैठक के लिए कुल सदस्यों के 40 फीसदी का समर्थन हो, तो बिना पार्टी प्रमुख की इजाजत के भी आपात स्थिति में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जा सकती है और इस तरह की बैठक पार्टी संविधान के खिलाफ नहीं है.

इस स्थिति में अब प्रश्न यह उठता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह या राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एक दूसरे को निष्कासित करने या अन्य दंड के दायरे में आते हैं या नहीं.

बताया जा रहा है कि इस अधिवेशन के लिए लखनऊ शहर में जगह-जगह पोस्टर और होर्डिंग्स लगे हैं, जिसमें शिवपाल की तस्वीर कहीं भी नहीं है.

बताया जा रहा है कि शिवपाल, मुलायम के कहने पर इस बैठक में नहीं गये हैं और वो इस समय जौनपुर में मंत्री पारसनाथ की पत्नी के तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने गये हुए हैं.

First published: 1 January 2017, 12:48 IST
 
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