Home » राजनीति » Mulayam Singh Yadav says Akhilesh a weak player & opposed any chances of alliance with other parties with SP
 

महागठबंधन का विरोध करते हुए मुलायम ने अखिलेश को कमजोर खिलाड़ी बताया

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 April 2017, 19:33 IST

समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच लगता है अभी भी तकरार चल रही है. अब मुलायम सिंह यादव ने खुलकर अखिलेश का विरोध करते हुए कहा है कि वे कमजोर खिलाड़ी हैं और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ महागठबंधन का फैसला गलत है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने और जीतने की ताकत रखती है.

2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से सिर्फ 5 सीटें जीतने के बाद मुलायम सिंह को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनावों में सपा की ताकत बढ़ेगी. लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन करने के बावजूद सपा को सिर्फ 47 सीटों से ही संतोष करना पड़ा और मुलायम की उम्मीदें टूट गईं.

यह साफ जाहिर है कि मुलायम सिंह नहीं चाहते थे कि सपा और कांग्रेस का गठबंधन हो, लेकिन अखिलेश यादव ने उन्हें दरकिनार करते हुए कांग्रेस का हाथ थामा. बहरहाल, यूपी में लगातार करारी शिकस्त के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती भी भाजपा के खिलाफ वर्ष 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में गठबंधन के लिए तैयार हैं.

आंबेडकर जयंती पर गठबंधन के लिए रजामंदी संबंधी मायावती के बयान के बाद अखिलेश ने कहा था कि वह सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ पहले भी हाथ मिलाने को तैयार थे और आज भी हैं. अखिलेश के उलट मुलायम सिंह का मानना है कि अभी लोकसभा चुनाव दूर हैं. भाजपा के खिलाफ जमीन पर तैयारी करनी चाहिए, गठबंधन की बात करेंगे तो जनता में संदेश जाएगा कि मोदी से डरकर अभी से कुनबा बटोरने लगे हैं.

मुलायम सिंह ने गठबंधन की चर्चाओं को बेकार करार देते हुए कहाकि अभी ऐसी कोई जरूरत नहीं है. लखनऊ में मीडिया के सवाल पर सपा संरक्षक ने कहाकि यह तो गलत वक्त पर गलत सवाल है. अखिलेश के बयान की तरफ ध्यान दिलाया गया तो बोले कि वह गलत वक्त पर गलत फैसला है. मुलायम ने किसी का नाम लिए बगैर कहाकि गठबंधन उन्होंने भी किया था, लेकिन चुनाव के वक्त या चुनाव नतीजों के बाद. अभी दूर-दूर तक चुनाव की आहट नहीं है, इतनी जल्दी गठबंधन के बारे में सोचने वाले राजनीति के कमजोर खिलाड़ी होते हैं.

 

उन्होंने कहा कि वह भाजपा के खिलाफ हैं और रहेंगे, लेकिन इतनी जल्दी गठबंधन करेंगे तो भाजपा इसे खौफ बताकर अपनी ताकत बढ़ाने के दूसरे रास्ते खोजने लगेगी.

विपक्ष की राजनीति में बसपा को साथ लेकर चलने के सवाल पर मुलायम सिंह ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. ज्यादा कुरेदने पर बोले कि सभी राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं हैं. कुछ लोग कहते कुछ हैं और वक्त आने पर करते कुछ हैं. सपा अपने एजेंडे पर आगे बढ़ेगी, कोई साथ चलेगा तो परहेज नहीं होगा, लेकिन न्योता देने नहीं जाएंगे.

मुलायम सिंह यादव का कहना है कि समाजवादी पार्टी किसी भी राजनीतिक दल से फिलहाल गठबंधन नहीं करेगी, सपा अकेले ही चुनाव लडऩे में सक्षम है. दूसरी ओर सपा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कल कहा था कि सपा तो सभी का स्वागत करने वाली पार्टी है, पहले भी स्वागत किया था, चुनाव नतीजों के बाद भी तैयार थे और आगे भी तैयार रहेंगे.

 

गौरतलब है कि आंबेडकर जयंती पर मायावती ने कहा था कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए बीजेपी और ईवीएम की गड़बड़ी के विरुद्ध लड़ाई में बीजेपी विरोधी पार्टियां भी आना चाहेंगी तो बसपा को कोई परहेज नहीं होगा.

हालिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन को 403 सीट में 325 पर कामयाबी मिली है,जबकि एसपी-कांग्रेस गठबंधन और बीएसपी के साथ निर्दलीयों को मिलाकर सिर्फ 73 सीट हासिल हुई है. वोट प्रतिशत की बात करें तो बीएसपी और समाजवादी पार्टी दोनों को ही करीब 22-22 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस को 6 फीसदी.

इसी प्रकार लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 सीटों में बीजेपी गठबंधन को 73 सीट मिली थी, जबकि सपा को पांच और कांग्रेस को रायबरेली तथा अमेठी की सिर्फ दो सीट। बसपा का खाता भी नहीं खुला था.

First published: 16 April 2017, 19:33 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी