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कांग्रेसी टोपी उतारकर भाजपा के हुए एनडी तिवारी, बेटा भी शामिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 January 2017, 13:13 IST

कद्दावर कांग्रेसी नेता नारायण दत्त तिवारी ने कांग्रेसी टोपी उतार दी है. 91 साल की उम्र में एनडी तिवारी ने बुधवार को दिल्ली में भाजपा का दामन थाम लिया. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के आवास पर तिवारी ने पार्टी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की. 

खास बात यह है कि एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर ने भी भाजपा की सदस्यता ली है. इस दौरान एनडी तिवारी की दूसरी पत्नी और रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा भी मौजूद रहीं. माना जा रहा है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में एनडी तिवारी के पुुत्र रोहित शेखर को बीजेपी टिकट देने वाली है. एनडी तिवारी भी इसी वजह से भाजपा में शामिल हुए हैं. 

एएनआई

दो राज्यों के इकलौते सीएम

नारायण दत्त तिवारी का जन्म 1925 में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था. उस वक्त भारत का ये हिस्सा 1937 के बाद से यूनाइटेड प्रॉविंस के रूप में जाना जाता था. 

आजादी के बाद संविधान लागू होने पर इसे उत्तर प्रदेश का नाम मिला. तिवारी के पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अधिकारी थे. महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के आह्वान पर पूर्णानंद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. 

नारायण दत्त तिवारी की शुरुआती पढ़ाई हल्द्वानी, बरेली और नैनीताल में हुई. पिता के तबादले की वजह से उन्होंने एक से दूसरे शहर में रहते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की. अपने पिता की तरह ही वे भी आजादी की लड़ाई में शामिल हुए. 

1942 में ब्रिटिश सरकार की साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ नारे वाले पोस्टर और पंपलेट छापने और उसमें सहयोग के आरोप में पकड़े गए. उन्हें गिरफ्तार कर नैनीताल जेल में डाल दिया गया. इस जेल में उनके पिता पूर्णानंद तिवारी पहले से ही बंद थे. 

1952 में सोशलिस्ट पार्टी से विधायक

तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए किया. उन्होंने एमए की परीक्षा में यूनिवर्सिटी टॉप किया था. बाद में उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री भी हासिल की. 1947 में आजादी के साल ही वह इस विश्वविद्यालय में छात्र यूनियन के अध्यक्ष चुने गए.

आजादी के बाद 1950 में उत्तर प्रदेश के गठन और 1951-52 में प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में तिवारी ने नैनीताल (उत्तर) सीट से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर हिस्सा लिया. कांग्रेस की हवा के बावजूद वे चुनाव जीत गए और पहली विधानसभा के सदस्य के तौर पर सदन में पहुंच गए. 

फाइल फोटो

1963 में कांग्रेस से जुड़े

बाद के दिनों में कांग्रेस की सियासत करने वाले तिवारी की शुरुआत सोशलिस्ट पार्टी से हुई. 431 सदस्यीय विधानसभा में तब सोशलिस्ट पार्टी के 20 लोग चुनकर आए थे. कांग्रेस के साथ तिवारी का रिश्ता 1963 से शुरू हुआ. 

1965 में वह कांग्रेस के टिकट पर काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए और पहली बार मंत्रिपरिषद में उन्हें जगह मिली. कांग्रेस के साथ उनकी पारी कई साल चली. 1968 में जवाहरलाल नेहरू युवा केंद्र की स्थापना के पीछे उनका बड़ा योगदान था. 

1976 में बने यूपी के सीएम

1969 से 1971 तक वे कांग्रेस के युवा संगठन के अध्यक्ष रहे. एक जनवरी 1976 को वह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. यह कार्यकाल काफी छोटा था. 1977 के जयप्रकाश आंदोलन की वजह से 30 अप्रैल को उनकी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा. 

एनडी तिवारी तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. वह अकेले राजनेता हैं जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उत्तर प्रदेश के विभाजन के बाद वे उत्तराखंड के भी मुख्यमंत्री बने. 

आंध्र प्रदेश में राज्यपाल का विवादित कार्यकाल

1990 में एक वक्त ऐसा भी आया जब राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी दावेदारी की चर्चा भी हुई. हालांकि अंत में कांग्रेस के भीतर पीवी नरसिंह राव के नाम पर मुहर लग गई. 

एनडी तिवारी 2007 से 2009 तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे, लेकिन यहां उनका कार्यकाल बेहद विवादास्पद रहा. एक विवादित सीडी में कथित रूप से दिखने के बाद उन्हें राज्यपाल का पद छोड़ना पड़ा था. हालांकि एनडी तिवारी ने इसे साजिश करार दिया था.

First published: 18 January 2017, 13:13 IST
 
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