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नोटबंदी सही थी या गलत इस पर सवाल मत कीजिए, बस कैबिनेट में फेरबदल पर ध्यान दीजिए

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 1 September 2017, 14:49 IST

पीएम मोदी अपनी कैबिनेट में इस बार बड़ा फेरबदल करने जा रहे हैं. माना जा रहा है लोकसभा 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ये आख़िरी फेरबदल हैं. मोदी-शाह की मुलाकात के बाद कई मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी होना तय है. 

मोदी सरकार में चार केंद्रीय मंत्रियों राजीव प्रताप रूडी, उमा भारती, संजीव बालियान और फग्गन सिंह कुलस्ते ने मंत्रिमंडल से अपना इस्तीफा पीएम को भेज दिया है. इनके अलावा यूपी के नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए महेंद्र नाथ पांडे का भी मंत्रिमंडल से जाना तय है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार अपने 10 मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर कर सकती है.

नोटबंदी के सवाल से ध्यान हटाने के लिए फेरबदल

सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं. लोगों का मानना है कि मोदी सरकार नोटबंदी की असफलता से बचने के लिए ये कदम उठाने जा रही है. दरअसल मोदी सरकार चाहती है कि कोई भी नोटबंदी पर सवाल ना उठाए इसलिए वो जनता का ध्यान कहीं और फोकस करना चाहती है.

नोटबंदी पर किए गए थे बड़े दावे

8 नवंबर 2016 को पीएम मोदी ने खुद देश को संबोधित करते हुए नोटबंदी की घोषणा की थी. उनका मानना था कि देश भर में होन वाली नोटबंदी से कालेधन पर लगाम लगेगी. पीएम मोदी ने दावा किया था कि इस नोटबंदी से आतंकवाद और नकली नोटों के बाज़ार में आने पर रोक लगेगी. उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वो इस काम में सराकर का सहयोग करें. 

 

बुधवार की शाम रिज़र्व बैंक ने आंकड़े जारी कर बताया था कि नोटबंदी के दौरान बंद किए गए 500 और 1000 के नोटों के रूप में 99% फीसदी रकम बैंकों के पास वापस आ चुकी है. आरबीआई को इस वित्तीय वर्ष में 7,62,072 फर्ज़ी नोट मिले, जिनकी क़ीमत 43 करोड़ रुपये थी. इसके पिछले साल 6,32,926 नकली नोट पाए गए थे. यह अंतर बहुत ज़्यादा नहीं है. 

आरबीआई ने बुधवार को बताया कि 'नोटबंदी के बाद देश में प्रचलन में रहे 15.44 लाख करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट में से 15.28 लाख करोड़ रुपये लोगों द्वारा नए नोट से बदलने के कारण प्रणाली में वापस लौट चुके हैं.' 

 

रिजर्व बैंक के आकड़ों से साफ होता है कि कालेधन पर इस फैसले से कोई खास लगाम नहीं लगी है

नोटबंदी की घोषणा के दिन प्रचलन में कुल 17.97 लाख करोड़ नोट थे, जिसमें से 86 फीसदी या 15.44 लाख करोड़ नोट 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट की शक्ल में थे, जिन्हें अवैध घोषित कर दिया गया था.

रिजर्व बैंक के आकड़ों से साफ होता है कि कालेधन पर इस फैसले से कोई खास लगाम नहीं लगी है. जिस डिजिटलाइजेशन की बात सरकार कर रही है उसके लिए इतना कड़ा फैसला लेने की ज़रुरत नहीं थी. नोटबंदी का असर जीडीपी पर भी पड़ा है. 

अप्रैल से लेकर जून 2017 तक की तिमाही के लिए जीडीपी घटकर 5.7 फ़ीसदी रह गई है. इस फैसले से विकास की रफ्तार को झटका कैसे लगा इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पिछले साल इसी तिमाही में जीडीपी बढ़ने की रफ्तार 7.9 फीसदी थी. इससे कम 4.6% विकास दर पांच साल पहले जनवरी-मार्च 2014 में रही थी.

हालांकि फेरबदल का आधार मंत्रियों का प्रदर्शन बताया जा रहा है. इसका आकलन खुद पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने किया. सहयोगी दलों के मंत्रियों को भी इसी आधार पर आंका गया है. आकलन के अन्य आधार संगठन से जुड़े कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से जुड़े हैं. 

First published: 1 September 2017, 14:49 IST
 
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