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खुलासा : जाधव विवाद के बावजूद चुपके-चुपके मिल रहे हैं भारत और पाकिस्तान के NSA

सुनील रावत | Updated on: 14 January 2018, 13:10 IST

भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और नसीर जंजुआ (सेवानिवृत्त) अब भी लगातार मुलाकात कर रहे हैं. अख़बार द हिन्दू की रिपोर्ट की माने तो इन दोनों ने अब तक बैंकाक में कम से कम तीन और रूस में एक मुलाकात की है. अख़बार के अनुसार दिल्ली और इस्लामाबाद के सूत्रों ने इसकी पुष्टि भी की है.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि एनएसए की बैंकाक में बैठक इसलिए हुई क्योंकि यह दोनों देशों से उड़ानों के लिए एक सुविधाजनक जगह है. जबकि दोनों टेलीफोन पर भी नियमित रूप से बातचीत कर रहे हैं.

एनएसए के बीच आखिरी मुलाकात 26 दिसंबर, 2017

रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों ने मई 25-26, 2017 को रूसी शहर ज़ाविदोवो के ट्वेर क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान बातचीत की. यही नहीं इस साल की मुलाकातों के लिए अभी भी काम किया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार दोनों के बीच आखिरी मुलाकात 26 दिसंबर, 2017 को हुई थी. इसी दौरान जाधव के परिवार को मिलने की अनुमति भी दी गयी थी.

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि आगामी दावोस वर्ल्ड इकनोमिक फोरम 22-23 में भी दोनों की मुलाकात हो सकती है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खैकन अब्बासी भी शामिल होंगे. 

रिपोर्ट की माने तो जब पाकिस्तान में बंद कुलभूषण जाधव से उनका परिवार मिला और पाकिस्तान ने जिस तरह उनके साथ व्यवहार किया, यह बहुत कष्टप्रद मुद्दा बन गया था. पूरे देश ने जाधव परिवार से असंवेदनशील व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त की थी . जबकि बैंकॉक में एनएसए बैठक उस वक्त मैत्रीपूर्ण और सकारात्मक माहौल में आयोजित की गई.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा, पाकिस्तानी पक्ष इस मामले में भारत में सार्वजनिक बयान से नाखुश था, क्योंकि जाधव के परिवार को मानवीय" संकेत के रूप में मुलाकात करवाई गयी थी.

भारत ने पाकिस्तान पर अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि जाधव से मिलने में उनके परिवार को अपमानित किया गया. उनके कपड़े  और आभूषणों को बदलवाया गया.

नवंबर 2015 में पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान हुई बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने एनएसए चैनल की की थी. जो जम्मू कश्मीर में हमलों के बावजूद जारी रही.

हालांकि पहली बातचीत पठानकोट हमले में पाकिस्तान की जांच पर फोकस थी. इसके बाद के संपर्कों में घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं, युद्धविराम के उल्लंघन और सीमा पार आतंकवाद तथा जाधव मामले को लेकर थी.

11 जनवरी को विदेश मामलों के मंत्रालय ने यह स्वीकार किया था कि भारत और पाकिस्तान के समाचार पत्रों में रिपोर्ट पेश होने के कुछ हफ्तों के बाद 26 दिसंबर को बैंकॉक में एनएसएए मुलाकात हुई थी. यह पहली बार था जब सरकार ने स्वीकार किया कि एनएसएए की दिसंबर 2015 के बाद बात हुई.

हालांकि पत्रकारों से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रविश कुमार ने कहा कि आतंकवाद और वार्ताएं एक साथ नहीं हो सकतीं.

First published: 14 January 2018, 13:07 IST
 
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