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'अभिव्यक्ति की आज़ादी को कमज़ोर करने की कोशिशों के सामने नहीं झुकेंगे'

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 June 2017, 11:40 IST
प्रणय रॉय

एनडीटीवी चैनल के मालिक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय से जुड़े कई परिसरों पर सीबीआई ने 5 जून सोमवार को तड़के छापा मारा. एनडीटीवी ने इन छापों को डराने और धमकाने वाली कार्रवाई करार दिया है. बैंक से फ्रॉड करने के मामले में चैनल के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद शीर्षस्थ जांच एजेंसी ने ये छापे मारे.

इस कार्रवाई पर मीडिया हाउस ने कहा, "हम इन आरोपों के खिलाफ अंत तक लड़ते रहेंगे. हम भारत में लोकतंत्र और आजाद आवाज को कुचलने के इन प्रयासों के आगे झुकने वाले नहीं हैं."

सीबीआई ने रॉय के ग्रेटर कैलाश 1 स्थित आवास के अलावा दिल्ली और देहरादून के कई ठिकानों पर छापे मारे. यह मामला एक कम्पनी आरआरपीएल होल्डिंग्स के बैंक को कर्ज न चुकाने से जुड़ा है. बताया जाता है कि यह कम्पनी रॉय के स्वामित्व वाली है.

एनडीटीवी में हिस्सेदारी रखने वाले कंपनी ने साल 2008 में आईसीआईसीआई बैंक से 396 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. कुछ खबरों में बताया गया है कि कम्पनी ने बैंक को 48 करोड़ रुपये चुकाने में चूक की. सीबीआई के ये छापे ऋण चूककर्ताओं पर बड़ी कार्रवाई का हिस्सा हैं.

वैसे यह पहली बार नहीं है कि जब आईसीआईसीआई के कर्ज की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है. वर्ष 2010 में पहली बार एक अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि आरआरपीएल और आईसीआईसीआई के बीच ऋण को लेकर एक साजिश है. खबर में दावा किया गया था कि कम्पनी के प्रत्येक शेयर को उस समय 439 रुपये की प्रतिभूति के रूप में रखा गया था, जबकि उसका वास्तविक मूल्य केवल 99 रुपये था. उस वक्त रॉय ने अख़बार के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराए जाने की बात कही थी.

कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं

उधर, सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने सीबीआई का बचाव करते हुए कहा कि सीबीआई के छापों के पीछे कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है और कानून अपना काम कर रहा है. नायडू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर कोई कुछ गलत करता है, तो आप सरकार से सिर्फ इसलिए चुप रहने की अपेक्षा नहीं कर सकते कि वह मीडिया से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि सीबीआई को कुछ सूचनाएं मिली थीं. तभी इस जांच संस्था ने कार्रवाई की. अधिकारी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं और इसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है.

एनडीटीवी के परिसरों पर छापेमारी पर भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आप मीडिया के लोगों, राजनीतिक नेताओं और डॉक्टरों आदि के बीच फर्क नहीं कर सकते. यदि आप कानून तोड़ते हैं, तब आपने कानून तोड़ा है. हमें कानून के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना चाहिए. इसके लिए हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. कानून का डर ज़रूरी है. यह सभी पर लागू होना चाहिए, इससे फर्क नहीं पड़ता आप कौन हैं."

एनडीटीवी का बयान

5 जून को छापे पड़ने के बाद चैनल ने जो बयान जारी किय़ा, वह इस तरह है:

"आज सुबह सीबीआई ने एनडीटीवी और उसके प्रमोटर्स को वही पुराने और झूठे आरोपों को लेकर निशाना बनाया. कई एजेंसियों द्वारा निशाना बनाए जाने के खिलाफ एनडीटीवी और उसके प्रमोटर अंत तक लड़ेंगे. हम भारत में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमजोर करने प्रयासों के सामने नहीं झुकेंगे." 

बयान में आगे कहा गया, "हम यह संदेश देना चाहेंगे कि जो लोग भारत की संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए हमारी तरफ से एक ही संदेश है- हम अपने देश के लिए लड़ते रहेंगे ओर इन ताक़तों को हरा कर बाहर निकलेंगे."

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी एक बयान जारी करते हुए सीबीआई के छापों की कड़े शब्दों में निंदा की है.

First published: 6 June 2017, 11:38 IST
 
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