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श्री श्री रविशंकर को NGT की दो टूक, आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 April 2017, 15:26 IST

एनजीटी ने अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को उनके रवैये के लेकर फटकार लगाई है.एनजीटी ने श्री श्री से कहा कि आप का जो बोलने का मन आएगा वो आप बोलेंगे. देश की सबसे बड़ी पर्यावरण अदालत ने रविशंकर से कहा 'क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती.

दरअसल एनजीटी द्वारा गठित विशेषज्ञों की टीम ने कहा था यमुना नदी के किनारे कि कई सौ एकड़ में आयोजित किए गए इस आयोजन की वजह से नदी को बहुत नुकसान हुआ है. इस कमेटी का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई में कम से कम दस साल लगेंगे और इस काम में पूरे 42 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

इस फैसले के बाद श्री श्री रविशंकर ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि पिछले साल यमुना नदी के किनारे हुए तीन दिन के सम्मेलन के आयोजन के लिए सरकार और अदालत को जिम्मेदार ठहाराया था. उन्होंने कहा था कि यह तो सरकार और अदालत की गलती है कि उन्होंने इस कार्यक्रम की अनुमति दी.

रविशंकर ने आगे लिखा है कि 'अगर किसी तरह का जुर्माना लगाना ही है तो केंद्र, राज्य और एनजीटी पर लगाया जाना चाहिए जिसने इस कार्यक्रम की अनुमति दी थी. अगर यमुना इतनी ही नाज़ुक और पवित्र है तो उन्हें वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल करने से हमें रोकना चाहिए था.'

गौरतलब है कि पिछले साल यमुना के किनारे आर्ट ऑफ लिविंग ने वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल का आयोजन किया था. जिसका देश के कई  पर्यावरणविदों ने विरोध किया था. बाद में  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस कार्यक्रम को कराने की इजाजत कुछ शर्तों के साथ दी थी.

एनजीटी का कहना था कि इस कार्यक्रम को रद्द करने के लिए बहुत देर हो चुकी है. एनजीटी ने श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग  पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाया था. लेकिन रविशंकर की संस्था ने पूरा जुर्माना नहीं दिया. इस कार्यक्रम में  पीएम नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत की थी.

First published: 20 April 2017, 15:26 IST
 
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