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पंजाब: नोटबंदी बनी चुनावी मुद्दा, कांग्रेस-आप में फायदा उठाने की होड़

राजीव खन्ना | Updated on: 26 December 2016, 8:04 IST

शिरोमणि अकाली दल और भाजपा, चंडीगढ़ नगर निकाय में अपनी जीत का श्रेय नोटबंदी को दे रहे हैं, पर सही मायने में देखा जाए, तो यह जीत नोटबंदी के कारण न होकर कई इतर वजहों से मिली है.

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए नोटबंदी मुख्य मुद्दा बना हुआ है. पंजाब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व और सभी नेता इसे प्रमुखता से चुनावी रैलियों में उठा रहे हैं. वह नरेंद्र मोदी के इस फैसले पर जनता की नाराजगी को भुनाने की कोशिश कर रही है.

आम आदमी पार्टी भी नोटबंदी से आम आदमी को हुई दुश्वारियों के लिए मोदी और भाजपा पर निशाना साध रही है.

किसान और उद्योग बेतहाशा प्रभावित

नोटबंदी को मुख्य मुद्दा बनाने की अहम वजह यह है कि इसने अब तक के राजनीतिक बहस के मुद्दों को और हवा दी है.

मसलन, कांग्रेस और आप दोनों ने अपने चुनावी मुहिमों में किसान की आत्महत्याओं और खेतों की दुर्गति को आधार बनाया था. नोटबंदी ने किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं. बीजों के इंतजाम से लेकर कमीशन एजेंटों के शोषण तक.

यही हाल कारोबार और उद्योगों का है, जो राज्य सरकार की मनमानी की पहले ही शिकायत कर रहे थे. नोटबंदी से औद्योगिक उत्पादन और ब्रिकी में और कमी आई है. छोटे कारोबारियों का धंधा तो बुरी तरह प्रभावित हुआ ही है. यह गिरावट कांग्रेस और आप के लिए राजनीतिक रूप से फायदे की बात है.

पंजाब में किसान सबसे महत्वपूर्ण मतदाता हैं, और कोई भी राजनीतिक पार्टी उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती. खासकर तब जब चुनाव में दो महीने ही शेष हैं. सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हुआ है, जो बीज और सब्जियां उगाते हैं.

पटियाला के एक गांव के किसान ने कहा, 'हम काम नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि हमारे लिए नकदी की आमदरफ्त नहीं है. मेरे खेतों में काम के हिसाब से 20 से 60 मजदूर काम करते हैं. मैं प्याज, टमाटर और मिर्ची के पौधे उगाता हूं. इन मजदूरों को देने के लिए नकद पैसा नहीं होने और उत्पादन से लाभ होने की अनिश्चितता में मंझधार में हूं.'

इसी तरह छोटे उद्यमियों का कहना है कि अपने मजदूरों को नकद भुगतान नहीं कर सकने के कारण वे उत्तरप्रदेश और बिहार लौट गए हैं.

कैप्टन अमरिंदर का हमला

राजनीतिक मोर्चे पर राज्य कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा आक्रामक रहे हैं. उन्होंने राज्य की गठबंधन सरकार को ही नहीं, बल्कि मोदी को भी निशाना बनाया है.

अमरिंदर ने कहा कि मोदी पलायन करने की बजाय सामने आएं और इन आरोपों का खुलासा करें. इस निरर्थक नोटबंदी नीति का सच बताएं, जिसने पूरे देश को गहरे वित्तीय संकट में डुबो दिया है. इससे लाखों भारतीयों को बेहद संकट का सामना करना पड़ रहा है.

कैप्टन नगर निकाय के चुनाव के परिणामों को नजरअंदाज करते हुए कहते हैं, 'केंद्र शासित प्रदेशों के मुद्दों पर केंद्र सरकार का नियंत्रण रहता है. उनकी तुलना इन मुद्दों से नहीं की जा सकती, जिनका सामना पंजाब के निर्वाचन क्षेत्र कर रहे हैं. अमरिंदर ने सर्वोच्च न्यायालय से भी आग्रह किया कि नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार के निरंतर बदलते निर्देशों पर रोक लगाई जाए. अमरिंदर ने कहा कि इन यू-टर्नों से लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी और विश्वासघात बढ़ा है.'

उन्होंने कहा कि दो महीने पहले युद्ध के उत्तेजक माहौल से लेकर नोटबंदी तक भारत में जो हालात बने, उससे लगता है कि मोदी सरकार देश में जानबूझकर अशांति को बढ़ा रही थी, इस मकसद से कि वह अपने राजनीतिक हितों में इजाफा कर सके और उद्यमों और अपनी पार्टी के मित्रों को बचा सके.

कांग्रेस ने छोटे उद्यमों से हाथ मिलाया

इलाके के समाचार पत्र उन उद्योगपतियों के चित्रों से रंगे थे, जिन्होंने अमृतसर में अपनी इकाइयों पर ताले लगाकर चाबियां उपायुक्त को थमा दी थीं. उनका आरोप था कि नोटबंदी ने उन्हें अपनी इकाइयां बंद करने के लिए मजबूर कर दिया है. इसके बाद लुधियाना में उद्योगपतियों ने जबर्दस्त विरोध प्रकट किया.

भाजपा नेता और राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रोफेसर राजिंदर भंडारी को एक कार्यक्रम में उत्तेजित उद्योगपतियों ने बोलने का मौका ही नहीं दिया. भंडारी मोदी सरकार और नोटबंदी की तरफदारी कर रहे थे.

पंजाब में कांग्रेस उपाध्यक्ष सुनील जाखड़ ने अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ नोटबंदी को लेकर उत्तेजित उद्योगपतियों और कारोबारियों के समर्थन में लुधियाना में धरना दिया.

इस मुद्दे पर अकालियों की चुप्पी पर जाखड़ ने सवाल करते हुए कहा, 'न तो मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और ना ही उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल में मोदी या अपनी सहयोगी पार्टी भाजपा के खिलाफ अपनी बात कहनेे की हिम्मत है.'

उन्होंने कहा, 'कैश की समस्या हल करने के लिए केंद्र सरकार से उनकी दलील 'अपर्याप्त थी और देर से भी की गई.'

आप के लिए करोड़ों का घोटाला

आप नेता भी पूरे पंजाब में अपनी सभी राजनीतिक रैलियों में नोटबंदी का मुद्दा उठा रहे हैं. सभी नेता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नक्शे-कदम पर चल रहे हैं. केजरीवाल का कहना है कि नोटबंदी हजारों करोड़ों का घोटाला है.

इस मुद्दे को लेकर अकाली दल बुरी स्थिति में फंस गया है. वे मौन हैं. उन्हें भाजपा का साथ जो चाहिए. ऐसे में उन्हें मोदी का फैसला मानना ही पड़ेगा.

First published: 26 December 2016, 8:04 IST
 
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