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भाजपा शासित राज्यों में भी लाभ के पदों पर हैं MLA, कार्रवाई सिर्फ AAP पर क्यों?

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 January 2018, 15:01 IST

केजरीवाल सरकार के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित किये  जाने की सिफारिश के बाद आम आदमी पार्टी  के निशाने पर चुनाव आयोग आ गया है. आम आदमी पार्टी के नवनियुक्त राज्यसभा सांसद संजय सिंह का कहना है कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के तौर पर काम कर रहा है.

संजय सिंह ने  एक अन्य मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि 2006 में दिल्ली सरकार में शीला दीक्षित ने 19 विधायकों को लाभ का पद दिया था.

उन्होंने कहा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी संसदीय सचिव पर विधायकों को नियुक्ति दी गयी थी.  हरियाणा में 4 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया. बंगाल, पंजाब में भी ऐसा हुआ. हिमाचल में 11 संसदीय सचिव को लाभ का पद दिया गया.

संजय सिंह ने कहा कि दूसरे राज्यों में हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों के पद को रद्द किया, लेकिन चुनाव आयोग ने कभी भी कोई सदस्यता रद्द नहीं की.

 

एक रिपोर्ट की माने तो 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा के 49 विधायकों में से  11 संसदीय सचिव पद पर कार्यरत हैं. दिल्ली की तर्ज़ पर यहां कार्रवाई हुई तो इनकी संख्या 38 रह जायेगी. 

राज्य के 11 संसदीय सचिवों के कामकाज पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा रखी है. रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त इन संसदीय सचिवों को मंत्रालय में अलग से कमरा, वेतन के 73,000 रुपए के अलावा 11,000 रुपए और मंत्रियों को मिलने वाली अधिकांश सुविधायें मिली हैं. 

First published: 20 January 2018, 14:54 IST
 
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