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सांसदों का इस बार नहीं होगा 'हैप्पी न्यू ईयर'

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 23 November 2017, 10:54 IST

मोदी सरकार ने इस साल संसद का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से शुरु करने का फैसला लिया है. मोदी सरकार गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पूरा होने के तुरंत बाद संसद सत्र बुला सकती है. सूत्रों के मुताबिक, गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बुधवार को हुई बैठक में यह तय हुआ है कि संसद का शीतकालीन सत्र पांच जनवरी तक चलेगा. जाहिर है कि सत्र के दौरान 13 बैठकें होंगी.

सूत्रों के मुताबिक सत्र की तिथियों की आधिकारिक घोषणा दिवाला व दिवालियापन संहिता संशोधन अध्यादेश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर होने के एक-दो दिन बाद हो सकती है, क्योंकि अध्यादेश की अधिघोषणा संसद सत्र के जारी रहने के दौरान नहीं की जा सकती है. संसद का सत्र जब औपचारिक रूप से शुरू हो जाता है तो संसद को सत्राधीन माना जाता है.

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए बुधवार को यह साफ किया कि संसद का शीतकालीन सत्र नियमित सत्र रहेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुजरात विधानसभा चुनाव की तिथियों के बीच संसद का सत्र आरंभ नहीं होगा. 

कैबिनेट की मीटिंग के बाद जेटली विपक्ष के आरोपों को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोपों लगाया है कि मोदी सरकार गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए 9 और 14 दिसंबर को होने वाले मतदान के पहले जानबूझकर संसद का सत्र नहीं बुला रही है.

गौरतलब हैै कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी में अपने संबोधन में कहा, "मोदी सरकार अपने घमंड में कमजोर आधार पर शीतकालीन सत्र में देरी कर भारतीय संसदीय लोकतंत्र पर काली छाया डाल रही है. मोदी सरकार अगर यह सोच रही है कि लोकतंत्र के मंदिर को बंद कर वह आगामी गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले संवैधानिक जिम्मेदारी से भाग जाएगी, तो वह भूल कर रही है."

सांसद नहीं कर पाएंगे 'हैप्पी न्यू ईयर' सेलिबेट्र

जैसी की खबरें आ रही हैं कि इस बार संसद का शीतकालीन सत्र गुजरात चुनाव के बाद शुरु होगा. ऐसे में मोदी सरकार के इस फैसले ने देश के कई सांसदों के छुट्टियों में घूमने के प्लान पर पानी फेर दिया है. इतना ही संसद का शीतकालीन सत्र के 5 जनवरी तक चलने की वजह से कई सासंदों के हैप्पी न्यू ईयर सेलिब्रेशन पर भी इसका असर पड़ना तय है. आमतौर पर संसद का शीतकीलीन सत्र 25 दिसंबर तक खत्म हो जाता है. इसी हिसाब से सांसद अपना शेड्यूल मनाते हैं. इस बार शीतकालीन सत्र की वजह से सासंदों को दिसंबर में दिल्ली आना होगा. 

इस बार दिसंबर में 23 और 24 तारीख को विकएंड पड़ रहा है. इसके अगले दिन 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी है. इसके अलावा दिसंबर में नये साल के जश्न पर भी विकएंड पड़ रहा है. इस बार दिसंबर में 30 और 31 दिसंबर को भी विकएंड है. ऐसे में निश्चित तौर पर सासंदो ने नए साल के जश्न की तैयारियां की होंगी. लेकिन मोदी सरकार ने सासंद के इन अरमानों को तोड़ दिया है.  

पिछले दस सालों में यह दूसरा मौका होगा जब संसद के शीतकालीन सत्र की अवधि इतनी छोटी होगी. इससे पहले साल 2013 में यूपीए वाली मनमोहन सरकार में शीतकालीन सत्र 11 दिन चला था. हालांकि ये पहला मौका है जब सरकार चुनाव की वजह से किसी सत्र को स्थगित किया है. साल 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद 16 राज्यों में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इनमें से 10 राज्यों में चुनाव की तारीख और संसद के सत्र के बीच टकराव हुआ. लेकिन मोदी सरकार ने सत्र स्थगित नहीं किया.

First published: 23 November 2017, 10:54 IST
 
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