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2019 के लोकसभा चुनाव से पहले VVPAT तैयार करना चुनाव आयोग के लिए बना चुनौती

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 July 2018, 12:23 IST

चुनाव आयोग अगले साल लोकसभा चुनावों के लिए 16 लाख मतदाता-सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनों की खरीद के लिए सुप्रीम कोर्ट को दी गई समय सीमा को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है.  24 अप्रैल 2017 को चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें 2019 के आम चुनावों के लिए सभी मतदान केंद्रों में वीवीपीएटी पेश करने का वादा किया गया.

यह भी कहा गया था कि दो पीएसयू कंपनियां इसके लिए काम कर रही हैं. इनमे भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (BEL) बेंगलुरु और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड हैदराबाद सितंबर 2018 तक आवश्यक पेपर ट्रेल मशीनों को वितरित करेंगे.

इस साल 19 जून को ईसी ने बीईएल और ईसीआईएल के साथ 16.15 लाख वीवीपीएटी के आदेश दिए जाने के लगभग 14 महीने बाद, मतदान पैनल को 3.48 लाख इकाइयां मिलीं - दूसरे शब्दों में समय सीमा से तीन महीने पहले लक्ष्य का केवल 22 प्रतिशत. शुरुआती आम चुनावों में बहस और अटकलों पर इसका सीधा असर पड़ता है. वीवीपीएटी की संख्याओं में मौजूदा कमी को देखते हुए, लोकसभा चुनावों को चुनौतियों से निपटना होगा.

एक वीवीपीएटी एक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का उपयोग करके वोट कास्ट का प्रिंटआउट तैयार करता है, जिसे मतदाताओं को संदेह दूर करने के लिए दिखाया जा सकता है. यह प्रिंटआउट तब एक बॉक्स में जमा किया जाता है और मतदान परिणामों के संबंध में किसी भी विवाद को हल करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है.

ईवीएम में सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए पेपर ट्रेल सिस्टम की शुरूआत महत्वपूर्ण है. 2019 में पूरे देश के लिए इस मॉडल को दोहराने के लिए ईसी को 16.35 लाख नियंत्रण इकाइयों (सीयू), 22.37 लाख मतपत्र इकाइयों (बीयू) और 16.35 लाख वीवीपीएटी तैनात करने की जरूरत है.

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First published: 25 July 2018, 12:19 IST
 
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