Home » राजनीति » 'preparing for the Europe trip, suddenly the offer to be the chief election commissioner' O P rawat
 

'पीएम मोदी के ऑफिस से अचानक आया मुख्य चुनाव आयुक्त बनने का ऑफर'

सुनील रावत | Updated on: 22 January 2018, 15:48 IST

भारत सरकार के सचिव के रूप में सेवानिवृत्त होने के एक साल बाद अगस्त 2015 में ओम प्रकाश रावत ने अपने परिवार के साथ यूरोप की यात्रा की योजना बनाई थी. यात्रा की तिथियों की पुष्टि के बाद और टिकट बुक किए जाने के बाद, वह और उनकी पत्नी दिल्ली पहुंच गए ताकि वे वीजा प्राप्त कर सकें. रावत पहले ही भोपाल में बस गए थे.

सामाजिक कार्य में समय व्यतीत कर रहे थे और मध्य प्रदेश में कॉलेजों में अकादमिक व्याख्यान दे रहे. जहां उन्होंने एक आईएएस अधिकारी के रूप में लंबे समय तक काम किया. ये बातें रावत ने एक अख़बार से बातचीत में कही. 

उन्होंने कहा, एक दिन अचानक उन्हें पीएमओ से एक फोन आया. जब कॉल करने वाले ने यह जानना चाहा कि क्या वह एक चुनाव आयुक्त के रूप में शामिल होना चाहते हैं और उन्हें जल्द निर्वाचन सदन ज्वाइन करना है. चुनाव आयोग में उनकी अप्रत्याशित प्रविष्टि सुनकर उन्होंने सबसे पहले अपनी यूरोप यात्रा को याद किया. दिमाग में यह ख्याल आया कि पत्नी को अकेले यात्रा पर जाना होगा. 

रविवार को रावत को भारत के 22 मुख्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया, जो सोमवार को सेवानिवृत्त होने वाले ए के ज्योति की जगह लेंगे. 

मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में रावत के पास 2 दिसंबर तक का कार्यकाल होगा, तब वह 65 वर्ष के हो जाएंगे.  ओपी रावत अगले महीने त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय के चुनावों को संभालने के बाद अप्रैल-मई में कर्नाटक और उसके बाद इस वर्ष के बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के चुनावों को देखेंगे. 

रावत ने घोषणा के तुरंत बाद अख़बार इकॉनोमिक टाइम्स से कहा कि "मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में मेरी प्राथमिकता निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव कराने और चुनाव सुधारों पर आम सहमति बनाने की निरंतरता होगी. 

चुनाव सुधारों की बात करते हुए रावत ने कहा, मैं आधार को पहचान पत्रों से जोड़ने का समर्थन करता हूं. उन्होंने कहा ''एक मतदाता मतदान केंद्र में प्रवेश करने से पहले एक पहचान स्थापित करें और उसे एक ईवीएम तक पहुंचाए''. 

रावत के सामने होंगी कई चुनौतियां 

बीते दिंनों चुनाव आयोग कि निष्पक्षता पर कई सवाल उठे. गुजरात और हिमाचल के चुनाव एक साथ न करवाने पर भी कई पार्टियों ने चुनाव आयोग को निशाने पर लिया. विधायकों को अयोग्य घोषति किये जाने के बाद आम आदमी पार्टी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्योति मोदी  सरकार के इशारों पर काम कर रहे हैं. गौरतलब है कि ए के ज्योति गुजरात में मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए काम कर चुके थे. जिसके बाद उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया. 

First published: 22 January 2018, 15:35 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी