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राष्ट्रपति चुनाव: भारतीय राजनीति में हो रहे हैं अच्छे-बुरे परिवर्तन

चारू कार्तिकेय | Updated on: 12 May 2017, 10:03 IST

राष्ट्रपति पद की दौड़ में दो बातें प्रमुखता से उभरी हैं. पहली यह कि अपने सभी अंतर्विरोधों और स्पर्धाओं के बावजूद विपक्ष की सभी पार्टियां इस मुद्दे पर एक हो रही हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस के एक सशक्त नेता ने भाजपा की ओर रुख कर लिया. यह मोटे तौर पर भारतीय राजनीति में अच्छे-बुरे परिवर्तनों का संकेत है.

कांग्रेस-सीपीएम-तृणमूल कांग्रेस, तीनों पार्टियां पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी के नाम पर सहमत हैं. जाहिर है, विपक्ष की पार्टियां सही उम्मीदवार के लिए अपने आपसी मतभेदों को ताक पर रख सकती हैं. वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने एनडीए के उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया है. इससे लगता है कि भाजपा आसानी से क्षेत्रीय नेताओं को इसके लिए राजी कर सकती है.

जगन क्यों?

नौ सांसदों के साथ, वाईएसआर कांग्रेस लोकसभा में दसवीं बड़ी पार्टी है. सीपीआई (एम) जितनी ही बड़ी. पार्टी के आंध्र प्रदेश में 66 विधायक और 6 विधान परिषद सदस्य हैं. इन संख्याओं के मद्देनजर यह देखना महत्वपूर्ण है कि रेड्डी के इन सबसे ताल्लुकात कैसे हैं. उनके मरहूम पिता वाईएसआर रेड्डी कांग्रेस पार्टी के मशहूर मुख्यमंत्री थे. कांग्रेस के ऐसे मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे भाजपा के साथ हो गए हैं. यह विपक्ष के खेमे के लिए काफी बड़ा नुकसान है. पर इससे बचा नहीं जा सकता था क्योंकि रेड्डी की कुछ कानूनी मुश्किलें थीं.

आय से अधिक संपत्ति के कारण 2012 में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. वह भी तब जब यूपीए सरकार सत्ता में थी. सीबीआई इसकी जांच कर रही है. रेड्डी को उस साल मार्च में गिरफ्तार भी किया गया और करीब डेढ़ साल बाद सितंबर 2013 में रिहा किया गया. इस मामले में सीबीआई ने दर्जनों चार्ज शीटें फाइल की हैं, जिसमें रेड्डी के अलावा 12 अन्य लोगों पर भी आरोप हैं. इनमें एक उनके ऑडिटर और अकेले राज्यसभा सदस्य वी विजय साई रेड्डी भी हैं.

इस साल मार्च के अंत में सर्वोच्च जांच एजेंसी ने हैदराबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट से रेड्डी की बेल रद्द करने को कहा. एजेंसी का आरोप था कि वे गवाहों को प्रभावित और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके एक महीने बाद ही रेड्डी यदि एलान करते हैं कि वे एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन करेंगे, तो इसमें शायद ही हैरानी होनी चाहिए. जबकि वह उम्मीदवार कौन होगा या होगी, इसकी घोषणा अभी हुई नहीं है.

सीबीआई की तलवार

वाईएसआर कांग्रेस पर ही नहीं, सीबीआई की तलवार सभी क्षेत्रीय पार्टियों पर लटकी हुई है. यूपीए और एनडीए दोनों के लिए, बीजू जनता दल बहुत काम की पार्टी है. बीजू जनता दल के लोकसभा में 20 और राज्यसभा में 7 सांसद हैं और ओडिशा में 117 विधायक हैं. क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि पार्टी के नेता और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास कितनी संपत्ति है? इससे ज्यादा क्या हो सकता है कि राज्य के बदनाम चिट फंड घोटाले में उनका भी नाम है और सीबीआई जांच चल रही है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी यही हाल है. पश्चिम बंगाल में भी चिट फंड घोटाले की सीबीआई जांच चल रही है. बनर्जी के करीबी कुछ तृणमूल नेताओं को जेल हो चुकी है. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की नारदा टीवी स्टिंग ऑपरेशन में जांच, उन पर एक और झटका है.

बिहार में, सीबीआई की अपील पर राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाले के आरोप को नए सिरे से उठाया गया है. इन मामलों में 9 महीने तक लगातार सुनवाई होगी. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की मायावती के खिलाफ भी आय से ज्यादा संपत्ति की जांच चल रही है. नरेंद्र मोदी शासन की मुखर आलोचक आम आदमी पार्टी पर दिल्ली पुलिस, सीबीआई और आयकर विभाग सहित कई केंद्रीय एजेंसियों ने मुकदमे चला रखे हैं.

हम सब एक हैं

सीबीआई के ख़तरे के बावजूद पार्टियां एक होने की कोशिश कर रही हैं. यूपी के चुनावों में भाजपा की शानदार जीत, और गोवा और मणिपुर में जिस तरह उसने सरकार बनाई, इससे वे सब घबरा गए हैं. उन्हें एकजुट होने में ही अपनी भलाई लग रही है. भाजपा को चुनौती देने का एकमात्र तरीका यही है.

विधानसभा चुनाव और अगले लोकसभा चुनावों में भले ही घोषित गठबंधन नहीं हो, पर उनकी आपसी मौन समझ हो सकती है. पर राष्ट्रपति चुनाव के लिए खुलकर एक होने की जरूरत है. इसलिए विपक्ष के नेता हर दूसरे दिन एक दूसरे का समर्थन करते नजर आ रहे हैं. एक ऐसा ही मौका 1 मई को था, जिस दिन मधु लिमये की जयंती थी. इसके अलावा उस दिन जब आप ने दिल्ली विधानसभा में बताया कि ईवीएम से छेड़छाड संभव है, तो डेमो के इस मौके पर आरजेडी, सीपीआई (एम) और तृणमूल कांग्रेस के नेता मौजूद थे.

डेमो के ठीक पहले जब दिल्ली मुख्यमंत्री पर उन्हीं के मंत्री ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, जनता दल यूनाइटेड ने अपना प्रतिनिधि, वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को उनका साथ देने के लिए भेजा. राष्ट्रपति चुनाव में गोपाल कृष्ण गांधी का साथ देने के लिए कड़े प्रतिद्वंद्वी तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई (एम) अपने मतभेद भुला रहे हैं. कुल मिलाकर, राष्ट्रपति चुनाव में वर्तमान भारतीय राजनीति में हो रहे अच्छे-बुरे परिवर्तन सामने आएंगे.

First published: 12 May 2017, 10:03 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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