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पंजाब चुनाव 2017: जानिए वो मुद्दे जो बदल सकते हैं जनता-जनार्दन का मूड

सुधाकर सिंह | Updated on: 3 February 2017, 14:13 IST
QUICK PILL

पंजाब में विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में कई मुद्दे उभरकर सामने आए. खासकर प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी का चुनावी चेहरा कैप्टन अमरिंदर सिंह और शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल ने एक नया मुद्दा छेड़ दिया. 

जहां एक ओर संगरूर और लंबी में चुनावी सभा के दौरान राहुल ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, वहीं सुखबीर सिंह बादल ने भी आप पर हमला करते हुए चरमपंथ को एक मुद्दा बना दिया. 

दरअसल बठिंडा के मौड़ मंडी में कांग्रेस की एक चुनावी सभा से महज 100 मीटर दूर हुए ब्लास्ट में 6 लोगों की मौत हो गई थी. केजरीवाल ने कांग्रेस और अकाली दल पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी नजर में पंजाब के सारे लोग आतंकवादी हैं. पंजाब में पहली बार त्रिकोणीय मुकाबला है, जिसमें कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिरोेमणि अकाली दल-बीजेपी के गठबंधन में टक्कर है. एक नजर उन मुद्दों पर जो चुनाव में जनता का मूड प्रभावित कर सकते हैं:

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ड्रग्स

पंजाब के चुनाव में नशाखोरी का मुद्दा काफ़ी चर्चा में रहा है. यहां तक कि आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र में भी इसका बोलबाला दिखा. आप ने अपनी सरकार आने पर ड्रग्स के काले कारोबार को जड़ से उखाड़ने का एलान किया है. इसमें एक महीने के अंदर ड्रग सप्लाई चेन खत्म करने, ड्रग डीलरों को सजा के लिए सख्त कानून और छह महीने में ड्रग के शिकार लोगों का पुनर्वास शामिल है. कांग्रेस ने भी अपनी चुनावी सभाओं में सरकार बनते ही एक महीने के अंदर ड्रग की समस्या से छुटकारा दिलाने का एलान किया है. घोषणापत्र में भी चार हफ्ते में ड्रग्स की समस्या के सफाए का वादा किया गया है. हालांकि सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल इसे कोई मुद्दा नहीं मानता. 

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रोजगार

हर राज्य की तरह पंजाब के चुनाव में रोजगार एक बड़ा मुद्दा है. कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए शहीद भगत सिंह रोजगार सृजन योजना लाने की बात कही है. इसके साथ ही पांच साल में हर घर में एक नौकरी का वादा किया है. सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण 12 से 15 फीसदी और दलित समुदाय के हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी का भी कांग्रेस ने वादा किया है. आम आदमी पार्टी ने भी रोजगार को मुद्दा बनाया है. पार्टी के घोषणापत्र में अगले पांच साल के दौरान 25 लाख नौकरियां और रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे. साथ ही हर जिला मुख्यालय में जॉब क्वालीफाइंग एग्जामिनेशन सेंटर बनाए जाने की बात है. जबकि अकाली दल ने अपने घोषणापत्र में 20 लाख युवाओं को सरकार बनने पर रोजगार देने का वादा किया है.        

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भूमिहीन दलित

पंजाब में दलित समाज की आबादी देश में सबसे ज्यादा तकरीबन 30 से 32 फीसदी है. ज़ाहिर है इतने बड़े दलित आबादी वाले सूबे में दलितों का वोट काफी मायने रखता है. दलित समाज कभी कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक हुआ करते थे. बहुजन समाज पार्टी के आने के बाद इस वोटबैंक में अकाली दल की सेंध लगी और आज सबसे नई दावेदार आम आदमी पार्टी इस तबके के मतों पर अपना हक़ जता रही है. 

ज़मीन के मुद्दे पर पंजाब का दलित दो हिस्‍सों में बंटा हुआ है. एक हिस्‍सा वह है जिसके पास राजनीतिक नुमाइंदगी के रूप में मायावती हैं या फिर जिसे अकाली या अन्‍य दलों की सरपरस्‍ती हासिल है. दूसरा तबका वह है जो इनमें से किसी को अपना तारणहार नहीं मानता. वह हक़ की बात करता है. हक़ उस 33 फीसदी पंचायती ज़मीन पर, जो 1961 के पंजाब जमीन नियमन कानून में उसे मिला था, लेकिन आज तक असलियत में नहीं मिला. 

पंजाब में 100 फीसदी नजूल की ज़मीन और 33 फीसदी पंचायत की ज़मीन दलितों के लिए आरक्षित है. पंचायत की यह 33 फीसदी ज़मीन कुल मिलाकर पंजाब में 50,000 एकड़ के आस-पास बैटती है. इसकी हर साल बोली लगती है.

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कट्टरपंथ

चुनाव प्रचार के आखिरी दौर तक पंजाब में चरमपंथ कोई मुद्दा नहीं था. लेकिन पिछले शनिवार को मौड़ मंडी में कांग्रेस प्रत्याशी और डेरा सच्चा सौदा के समधी हरमंदर जस्सी की रैली से केवल सौ मीटर दूर हुए बम विस्फोट ने पंजाब के चुनाव में आतंकवाद को एक मुद्दा बना दिया है. 

सुखबीर सिंह बादल ने कहा, "आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को पंजाबियों को बताना चाहिए कि वे उग्रवादियों के मुखौटा संगठनों के साथ मेल-मिलाप क्यों कर रहे हैं और उनसे धन क्यों ले रहे हैं." कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल उन कट्टरपंथी ताकतों की मदद कर रहे हैं, जिन्होंने पंजाब को अतीत में बर्बाद किया है. यहां तक कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी यह कहकर केजरीवाल को घेरा कि पंजाब 70 के दशक के बाद का दौर नहीं देखना चाहता, जब 35 हजार पंजाबियों की जान चली गई थी.

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भ्रष्टाचार

इसके अलावा भ्रष्टाचार का मुद्दा भी पंजाब की सियासी फ़िज़ाओं में गूंजता नजर आया. खासकर बादल परिवार के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाते हुए अरविंद केजरीवाल ने सीएम प्रकाश सिंह बादल से लेकर सुखबीर सिंह बादल पर करारा हमला बोला. 

बादल परिवार पर संसाधनों से लेकर सरकारी योजनाओं में लूट का आरोप लगाते हुए आप ने तकरीबन हर रैली में घेरा है. यहां तक कि आप ने अपने मेनिफेस्टो में कहा है कि सरकारी ठेकों से आप की सरकार माफिया राज को खत्म कर देगी. यही नहीं सांसद, विधायक, मंत्री और उनके रिश्तेदारों की सरकारी ठेकों के लिए अर्हता नहीं होगी. 

वहीं कांग्रेस ने भी परिवारवाद पर अकालियों को घेरा है. संगरूर और लंबी में प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरु नानक की सीख का हवाला देते हुए कहा कि उनकी शिक्षा तेरा-तेरा की थी, जबकि बादल सरकार मेरा-मेरा में लगी है. 

First published: 3 February 2017, 14:13 IST
 
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