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पंजाबः टिकट बंटवारे पर अमरिंदर को पूरी छूट!

राजीव खन्ना | Updated on: 3 November 2016, 7:51 IST
QUICK PILL
  • अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के लिए कांग्रेस आलाकमान ने एक समिति का गठन कर दिया है. 
  • इस समिति में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि टिकटों का बंटवारा उन्हीं के मन-मुताबिक किया जाएगा. 

पंजाब कांग्रेस के ताज़ा तेवर को देखते हुए लगता है कि सूबे के विधानसभा चुनाव में दूसरे दलों को कड़ी टक्कर देगी. मगर  अभी पार्टी के सामने बड़ी चुनौती टिकटों का बंटवारा है. पार्टी की सफलता कमोबेश इसी पर टिकी है.

प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को उम्मीद है कि टिकट बंटवारे के मामले में पार्टी हाईकमान बहुत ज्यादा दख़लअंदाज़ी नहीं करेगा. यह भी कि स्थानीय नेताओं को पूरी छूट मिलेगी कि वे मैदान में उतारे जाने वाले उम्मीदवार तय करें. 2012 में कांग्रेस ने यही बड़ी गलती की थी जिसका ख़ामियाजा उसे हार के रूप में उठाना पड़ा था. 

बीते सप्ताह कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई में एक जांच समिति गठित की है. कांगेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इसके लिए मंजूरी दे दी है. उन्होंने साफ कर दिया है कि यह कमेटी ही उम्मीदवारों की मोटेतौर पर पड़ताल करेगी और प्रदेश नेतृत्व के साथ सलाह मशविरा करने के बाद आलाकमान को भेजेगी. इसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति अंतिम फैसला करेगी. 

अमरिंदर की बड़ी योजनाएं

समिति में अमरिंदर और चन्नी, पंजाब से ये दो ही नेता शामिल किए गए हैं. इससे लगता है कि हाईकमान ने उम्मीदवार चुनने के लिए अमरिंदर को छूट दे दी है. समिति में न तो पूर्व प्रदेश कांग्रेस प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा को शामिल किया गया और न ही पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल को और न ही पूर्व विधायक दल नेता सुनील जाखड़ को. 

एक राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, 'लगता है पार्टी ने उम्मीदवार चुनने के लिए अमरिंदर सिंह को ही खुली छूट दे दी है, क्योंकि उम्मीदवार चयन में चन्नी तो मुश्किल से ही कुछ कहेंगे, क्योंकि समिति में उनसे ज्यादा प्रभावशाली लोग हैं. लेकिन सारी छूट मिलने के बावजूद देखना यह है कि क्या अमरिंदर अब तक कही गई अपनी बातों पर कायम रहेंगे. अब तक वे कहते आए हैं कि पार्टी एक परिवार में एक ही टिकट देगी. उन्होंने वादा किया कि इसकी शुरुआत वे अपने परिवार से ही करेंगे. इसका मतलब है कि वे उनकी पत्नी प्रिणीत कौर या बेटे रानिंदर में से किसी एक को ही चुनाव मैदान में उतरेंगे.

अमरिंदर ने एक टिकट प्रति परिवार का मंत्र दिया है और इसकी शुरूआत अपने ही परिवार से करने का वादा किया है

अमरिंदर की इस घोषणा से प्रदेश भर में कांग्रेस के बड़े नेताओं में गुस्सा है क्योंकि वे न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने रिश्तेदारों के लिए भी टिकट की आस लगाए बैठे थे. मगर जो भी हो, अमरिंदर पिछले कुछ महीनों से यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि वे एक टिकट प्रति परिवार के अपने सिद्धांत पर अडिग हैं. देखते हैं कांग्रेस इस सिद्धान्त को कहां तक ले जाती है. 

अगर यह फेल हुआ तो यह उन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ ठीक नहीं होगा, जो हमेशा यही शिकायत करते हैं कि प्रदेश में कुछ परिवारों ने ही पार्टी पर ज्यादा हक जमाया हुआ है. इसके उलट अगर यह सिद्धान्त चल निकलता है तो अमरिंदर न केवल एक नई परम्परा शुरू करेंगे बल्कि पार्टी को जमीनी स्तर पर ओर मजबूत बनाएंगे.

अमरिंदर का दूसरा प्लान यह है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं को ईनाम देंगे, जो बिना टिकट की मांग किए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जीत के लिए काम करते हैं. उन्होंने कहा, 'अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो ऐसे कार्यकर्ताओं को बोर्ड और निगमों का प्रबंधक बनाया जाएगा. हालांकि चुनाव मैदान में उतरने वाले कांग्रेसियों को यह लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वे जीतें या हारें'. माना जा रहा है कि यह कदम स्थानीय स्तर से उठकर व्यापकतौर पर प्रभावी हो सकता है. इसके साथ ही चुनाव लड़ने वालों से कहा गया है कि वे इस आशय का शपथ पत्र दाखिल करें कि अगर उन्हें पार्टी से टिकट नहीं भी मिला तो वे बगावत नहीं करेंगे.

पार्टी ने साथ ही हर लड़ने के इच्छुक नेता से अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के दो वोटरों के बारे में उनके वोटर आईडी कार्ड पर सीरियल नम्बर, आधार कार्ड और मोबाइल नम्बर सहित पूरी जानकारी देने को कहा है. यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि टिकट मांगने वालों की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सके. 

युवाओं को 30 प्रतिशत टिकट देने की कांग्रेस की घोषणा ने कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है. देखना यह है कि कांग्रेस अपने वादे पर कायम रहती है कि नहीं. उत्साहित युवा वर्ग पार्टी के कार्यक्रमों में जोश के साथ भाग ले रहा है और बहुत से अभियानों में आगे बढ़ कर हिस्सा ले रहा है. वर्तमान में चल रहा किसान अभियान, जिसमें पार्टी ने कर्ज माफी का वादा किया है, पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित हुआ है.

अंदरूनी सुगबुगाहट

हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे पार्टी की उम्मीदवारों की अंतिम सूची बाहर आएगी, पार्टी को कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष का सामना करना होगा. एक सूत्र ने कहा, 'हम जानना चाहते हैं कि प्रतिद्वंदी दलों से तोड़कर लाए जा रहे नेताओं को पार्टी कहां व कैसे समाहित करेगी. 

और अगर उन्हें टिकट दे दिया तो पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को कैसे मनाएगी? रातों रात कांग्रेस का चरित्र तो नहीं बदल जाएगा'. कुछ नेता ऐसे भी हैं कि अगर उन्हें टिकट का मना कर दिया गया या हाईकमान कुछ सीटों पर अपने ही उम्मीदवार उतारना चाहे तो वे पार्टी में कलह करवा कर ही छोड़ेंगे.

अब भी कहीं न कहीं तसल्ली की बात यह है कि बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता टिकट लेना चाह रहे हैं, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि टिकट बंटवारे में पार्टी हाईकमान को बहुत अधिक दखल नहीं देना चाहिए. कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि पार्टी को अपने उम्मीदवारों की घोषणा शीघ्र करनी चाहिए ताकि वे विधानसभा क्षेत्रों में काम करने का समय निकाल सकें. आम आदमी पार्टी इस मामले में आगे रही और उसने 61 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए और पार्टी बाकी के उम्मीदवारों की घोषणा भी कुछ ही दिन में कर देगी.

First published: 3 November 2016, 7:51 IST
 
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