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RBI के आंकड़ों ने नोटबंदी की सफलता पर उठाए सवाल!

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 August 2017, 11:33 IST

पिछले साल नवंबर में मोदी सरकार द्वारा लागू की गई नोटबंदी का बेहद कम प्रभाव पड़ने का खुलासा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने बुधवार को किया.

आरबीआई ने बुधवार को बताया कि 'नोटबंदी के बाद देश में प्रचलन में रहे 15.44 लाख करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट में से 15.28 लाख करोड़ रुपये लोगों द्वारा नए नोट से बदलने के कारण प्रणाली में वापस लौट चुके हैं.'

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी सालाना रपट में कहा गया है, "सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर भविष्य के सुधार के अधीन 30 जून, 2017 तक प्राप्त एसबीएन का अनुमानित मूल्य 1,528 अरब रुपये था." आरबीआई के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में प्रतिबंधित 1,000 रुपये के कुल 8.9 करोड़ नोट, जिसका मूल्य 8,900 करोड़ रुपये है, वह प्रणाली में वापस नहीं लौटा, जबकि उस समय प्रचलन में 1,000 रुपये के कुल 670 करोड़ नोट थे. 

आरबीआई के मुताबिक, प्रतिबंधित 1,000 रुपये के जो नोट वापस नहीं लौटे हैं, वे साल 2016 के आठ नवंबर से पहले प्रचलन में रहे कुल नोटों का महज 1.3 फीसदी हैं. नोटबंदी की घोषणा के दिन प्रचलन में कुल 17.97 लाख करोड़ नोट थे, जिसमें से 86 फीसदी या 15.44 लाख करोड़ नोट 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट की शक्ल में थे, जिन्हें अवैध घोषित कर दिया गया.

केंद्रीय बैंक ने हालांकि प्रतिबंधित 500 रुपये के कितने नोट वापस लौटे, इसका अलग से आंकड़ा नहीं दिया है. 
नकली भारतीय मुद्रा (एफआईसीए) रपट में आरबीआई ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में कुल 7,62,072 नकली नोट पकड़े गए हैं, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान कुल 6,32,926 नकली नोट जब्त किए गए थे.

आरबीआई ने कहा कि प्रचलन में जारी नोटों की संख्या में नोटबंदी के असर से इस साल 20.2 फीसदी की गिरावट आई है, जो 13.1 लाख करोड़ रुपये है. वहीं, बैंकनोट की संख्या में हालांकि 11.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, क्योंकि छोटे नोट ज्यादा छापे जा रहे हैं और चलन में हैं.

आरबीआई द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 2017 के मार्च तक 2,000 रुपये के नोट प्रचलन में जारी कुल नोट का 50.2 फीसदी थे. वित्त वर्ष 2016-17 में नए नोट छापने पर आरबीआई ने कुल 7,965 करोड़ रुपये खर्च किए.

First published: 31 August 2017, 11:33 IST
 
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