Home » राजनीति » RSS affiliated farmer union union told modi govt fail on farmer issues
 

RSS की किसान यूनियन ने मोदी सरकार को बताया फेल!

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2017, 12:15 IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभाकर खेलकर ने कहा कि मोदी सरकार किसानों से जुड़े मामलों को सुलझाने में फेल रही है. खेलकर ने कहा कि किसानों को मजबूर होकर अपना अनाज कम दामों पर बेचना पड़ रहा है और यही कारण है कि आज किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं.

न्यूज़ चैनल नेटवर्क 18 को दिए एक इंटरव्यू में खेलकर ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हुआ, क्योंकि वे पूरी तरह से कैश पर ही निर्भर करते हैं. उनके पास कैश नहीं था, जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी. इसके बाद खेलकर ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अनुपयोगी मवेशियों को बाजार में न बेचने वाले निर्देश से भी किसानों को काफी नुकसान हुआ है.

उन्होंने कहा कि अगर किसान अनुपयोगी मवेशियों को नहीं बेचेंगे, तो वे उनपर बोझ बन जाएंगे. मध्य प्रदेश के मंदसौर में चल रहे किसान आंदोलन पर बात करते हुए खेलकर ने कहा कि पिछले तीन सालों में किसानों के लिए कुछ भी नहीं किया गया है, लेकिन मोदी सरकार लाभ कमा रही है.

किसान यूनियन के नेता ने कहा कि पिछले साल खेती के दौरान फसल की काफी कम पैदावार हुई थी. इस साल काफी अच्छी फसल हुई है, लेकिन किसानों को उनकी फसल के दाम काफी कम दिए जा रहे हैं. किसान दिन-रात मेहनत करके फसल उगाते हैं, लेकिन उन्हें मजबूरी में कम दाम में अनाज बेचना पड़ रहा है.

खेलकर ने कहा, "सरकार किसानों को एक कौड़ी भी अतिरिक्त नहीं देना चाहती. अब समय आ गया है कि सरकार को किसानों के हित में कोई फैसला लेकर उनकी मदद करनी चाहिए. विकास के नाम पर सरकार केवल कई सारे प्रतिबंध लगा रही है, जिससे कि कोई कुछ कर ही न सके."

गौरतलब है कि मंदसौर में कर्ज माफी को लेकर जहां किसानों का विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है, वहीं इसकी आग अब देश भर में फैलने लगी है. कांग्रेस कार्यकर्ता मंदसौर हिंसा और वहां पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत के खिलाफ सड़कों पर हैं.

बिहार, बंगाल, ओडिशा, असम, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने रेल रोको आंदोलन चलाया. इसकी वजह से कई रूट पर ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा.

First published: 10 June 2017, 10:35 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी