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शिवसेना: राष्ट्रपति पद पर कोई हिंदुत्व का रबर स्टैंप बैठे

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2017, 10:49 IST

शिवसेना आगामी जुलाई महीने में होने वाले राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए लगातार आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम आगे बढ़ा रही है. शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि आज ऐसे व्यक्ति की जरूरत है, जो भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बना सके और राम मंदिर और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों का हल निकाल सकें.

शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखे एक संपादकीय के मुताबिक, "अभी तक धर्मनिरपेक्ष सरकारों के रबर स्टैंप ही राष्ट्रपति भवन में रहे हैं." शिवसेना के मुताबिक अब राम मंदिर, समान नागरिक संहिता और संविधान के अनुच्छेद 370 जैसे विषयों का समाधान निकालने के लिए जरूरी है कि राष्ट्रपति पद पर कोई हिंदुत्व का रबर स्टैंप बैठे.

शिवसेना ने कई बार कहा है कि देश के सर्वोच्च पद के लिए संघ प्रमुख भागवत उसकी पहली पसंद हैं. हालांकि 66 साल के भागवत कह चुके हैं कि उन्हें राष्ट्रपति पद में कोई रुचि नहीं है. अगर जरूरत पड़ी तो 17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव होंगे. इनमें भाजपा को अपनी सहयोगी शिवसेना से 18 सांसदों और 63 विधायकों का समर्थन मिलने की उम्मीद है.

समाना के संपादकीय में लिखा है कि गणना के अनुसार, राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के 23 घटक दलों के पास 48 प्रतिशत वोट हैं, जबकि यूपीए के 17 घटक दलों के 26 प्रतिशत वोट हैं.

पिछले दो राष्ट्रपति चुनावों में भाजपा से अलग रास्ता अपनाती रही शिवसेना ने गुरुवार को कहा था कि वह राष्ट्रपति चुनाव में ‘स्वतंत्र’ रुख अपना सकती है. पिछले राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था.

2012 में हुए चुनावों में भाजपा ने पीए संगमा का समर्थन किया था. साल 2007 में शिवसेना ने एनडीए के उम्मीदवार भैरों सिंह शेखावत के बजाय यूपीए उम्मीदवार महाराष्ट्र की प्रतिभा पाटिल को वोट दिया था. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की प्रशंसा करते हुए शिवसेना ने लिखा है कि उनके और डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जैसे लोगों ने इस पद की गरिमा को बनाए रखा है.

संपादकीय के मुताबिक, प्रणब मुखर्जी कांग्रेसी विचारधारा से हैं, लेकिन उसके बाद भी वह एक सक्षम और मजबूत राष्ट्रपति रहे हैं. विभिन्न क्षेत्रों में उनका व्यापक अनुभव देश के लिए बहुत लाभकारी साबित हुआ है.

First published: 10 June 2017, 10:49 IST
 
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