Home » राजनीति » Sitaram Yechury: We have to save values of our Republic from votaries of Hindu Rashtra
 

येचुरी: हिंदू राष्ट्र का राग अलापने वाले भारतीय गणतंत्र के लिए ख़तरा बन रहे हैं 

भारत भूषण | Updated on: 10 May 2017, 16:13 IST
आर्य शर्मा/ कैच न्यूज़

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कैच को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भाजपा सरकार और आरएसएस की नीतियां भारतीय गणतंत्र के लिए खतरा बनती जा रही हैं. ये देश में नफ़रत और सांप्रदायिकता का ज़हर फैला रहे हैं. इस पर काबू पाने के लिए सभी विपक्षी राजनीतिक पार्टियों को लामबंद होने की ज़रूरत है. कैच न्यूज़ के संपादक भारत भूषण को दिए इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि इस मुहिम में पार्टियां जनआंदोलनों और गैर सरकारी संगठनों को भी शामिल करें.

येचुरी ने कहा कि इन सबको एक मंच पर लाने के लिए उनकी पार्टी संसद के मानसून सत्र के पहले एक सम्मेलन रख रही है. आम तौर पर यह सत्र मध्य जुलाई में होता है. येचुरी ने सम्मेलन में उन सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों और सामाजिक आंदोलनों से शामिल होने की अपील की है, जो सांप्रदायिकता के खिलाफ हैं. येचुरी ने माना कि क्षेत्रीय अंतर्विरोधों और आपसी स्पर्धा के कारण विपक्ष की सभी पार्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर एक करना आसान नहीं है, फिर भी उन्हें सांप्रदायिकता के विरोध में एकजुट होना ज़रूरी है.

येचुरी ने कहा, "यह सरकार और आरएसएस, हमारे धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक भारतीय गणतंत्र को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने पर आमादा हैं. आरएसएस ने हिंदू राष्ट्र के लिए सबसे पहले आवाज़ 1920 के दशक के मध्य उठाई थी. इसका वैचारिक विरोध जरूरी है. हमारे संवैधानिक गणतंत्र की नींव को मजबूत बनाए रखने के लिए, उसकी सुरक्षा के लिए."

येचुरी ने आगे कहा, "देश को वैकल्पिक राजनीतिक विचारधारा की जरूरत है और यह वैचारिक विरोध से ही संभव है. इसी से उसके लिए सैद्धांतिक राजनीति विकसित की जा सकती है. वैकल्पिक राजनीतिक विचारधारा हमें केवल जन आंदोलनों से ही मिल सकती है, जो वास्तविक समस्याओं और मुश्किलों से जूझ रहे हैं."

 

सीपीआई (एम) महासचिव ने बताया कि लेफ्ट उन सब पार्टियों से जुड़ने को तैयार है, जो भारतीय संविधान के स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के तीन मौलिक सिद्धांतों की रक्षा के लिए वचनबद्ध हैं, और देश में एक वैकल्पिक विचारधारा चाहती हैं.

क्या आपकी पार्टी, आपका खुलकर विरोध कर रही विभिन्न समाजवादी पार्टियों के साथ काम करने को तैयार है? येचुरी ने इस सवाल पर कहा, "सबको समान वैचारिक धरातल पर आने की जरूरत है. आर्थिक शोषण के ख़िलाफ़ संंघर्ष को सामाजिक शोषण के ख़िलाफ़ संघर्ष से जोड़ने की ज़रूरत है. भारत में दो भिन्न वर्ग-संघर्ष हैं, एक आर्थिक शोषण के ख़िलाफ़ और दूसरा सामाजिक शोषण के ख़िलाफ़. अब ये दोनों लड़ाई मिलकर लड़ने की ज़रूरत है."

येचुरी ने वाम और वैकल्पिक वाम के एक होने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, "यदि वाम और वैकल्पिक वाम को देश के लिए वैकल्पिक राजनीतिक विचारधारा बनाने में योगदान करना है, तो साम्यवादियों और समाजवादियों को मिलकर काम करना पड़ेगा."

येचुरी ने यह भी कहा कि लेफ्ट के साथ ही सामाजिक वाम या गैर-वाम पार्टियों को भी मजबूती से एक होना है. पारंपरिक कम्युनिस्ट पार्टियां इसमें पहले विफल रही हैं. हम सोचते हैं कि सांप्रदायिकता-विरोधी पहल करना बेहद ज़रूरी है. हम इसे पारंपरिक वाम संगठनों से परे विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

निकट भविष्य में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को आप विपक्ष की एकता के लिए अग्नि-परीक्षा मानते हैं? इस पर येचुरी ने कहा कि यह राष्ट्रपति चुनाव उन लोगों के बीच की लड़ाई होगी, जो हमारे गणतंत्र के धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक आधार को बनाए रखना चाहते हैं और जो उसके आधार (गणतंत्र के) को नष्ट करना चाहते हैं.

येचुरी ने कहा, "दो अलग-अलग पक्ष बन चुके हैं और विपक्ष की पार्टियों को यह तय करना है कि वे किसके साथ हैं. राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा कुछ भी रहे, विपक्ष की एकता ज़रूरी है. यह सरकारी एजेंडे का विरोध करने की दृढ़ता का महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत होगा."

भाजपा सरकार सत्ता में बने रहने के लिए विकास की बातें कर रही है, लोगों को सपने दिखा रही है. येचुरी ने इसे कॉस्मेटिक कवर बताते हुए कहा कि इस खूबसूरत आड़ में वह अपना लक्ष्य पूरा कर रही है. उसका वास्तविक एजेंडा लोगों में नफ़रत और विभाजन पैदा करना है. जो सपने उसने लोगों को दिखाए, वे ध्वस्त हो गए हैं. बेरोजगारी बढ़ रही है, कृषि संकट बढ़ रहा है और आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है.

येचुरी ने कहा कि भारत की आज की स्थितियों की तुलना दो विश्व युद्धों के बीच के यूरोप की स्थिति से नहीं की जा सकती. भारत में जो हो रहा है, उसे फासीवाद भी नहीं कहा जा सकता. पर जिस तरह के उपाय काम में लिए जा रहे हैं, वे फासिस्टों की याद ताज़ा करते हैं. अभी भारत में फासीवाद आया नहीं है, पर उन्होंने चेतावनी दी कि हालात वैसे बन सकते हैं.

First published: 10 May 2017, 11:55 IST
 
भारत भूषण @Bharatitis

Editor of Catch News, Bharat has been a hack for 25 years. He has been the founding Editor of Mail Today, Executive Editor of the Hindustan Times, Editor of The Telegraph in Delhi, Editor of the Express News Service, Washington Correspondent of the Indian Express and an Assistant Editor with The Times of India.

अगली कहानी