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सहारा-बिड़ला डायरी: मोदी को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की प्रशांत भूषण की याचिका

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 January 2017, 16:39 IST

जिस सहारा-बिड़ला डायरी को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, बुधवार को उस मामले में केंद्र को बड़ी राहत मिली है. 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की जनहित याचिका खारिज कर दी है. प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जांच की मांग की थी. हाल ही में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस डायरी में गुजरात सीएम लिखा होने का हवाला देते हुए पीएम मोदी को घेरा था. 

'जांच के लिए पुख्ता सबूत नहीं'

सुप्रीम कोर्ट से भूषण ने सहारा और बिड़ला के दफ्तर पर आयकर छापे के बाद कुछ राजनेताओं का नाम आने का आरोप लगाते हुए इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका कोे खारिज करते हुए कहा कि जांच के लिए इस मामले में पर्याप्त सबूत नहीं हैं. 

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में कोई निश्चित सबूत नहीं मिले हैं. लिहाजा जांच कराने की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. अदालत ने साथ ही कहा कि दस्तावेजों को प्रमाण के तौर पर नहीं माना जा सकता.

प्रशांत भूषण ने उठाए सवाल

याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं. प्रशांत भूषण ने कहा कि यह पूरा मामला पब्लिक डोमेन में है. यही नहीं बहुत सारे दस्तावेज भी सार्वजनिक हो चुके हैं. 

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि प्रमाण की अनदेखी कैसे की जा सकती है?  

क्या था आरोप?

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस डायरी को लेकर कई बार हाल में पीएम मोदी को घेर चुके हैं. आरोपों के मुताबिक 15 अक्टूबर 2013 को आदित्य बिड़ला समूह पर पड़े आयकर के छापे की में समूह के तत्कालीन उपाध्यक्ष शुभेन्दु अमिताभ ने 25 करोड़ रुपए की रिश्वत गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को दी थी. 

विपक्ष का आरोप है कि केन्द्र में भाजपा के सत्ता में आने के तुरंत बाद यह मामला निपटान आयोग के सुपुर्द कर पूरी तरह दफना दिया गया. राहुल और केजरीवाल का आरोप है कि आदित्य बिड़ला समूह के ये कागजात मोदी के कार्पोरेट घरानों से रिश्वत लेने के अकेले उदाहरण नहीं हैं. 

सहारा समूह पर 22 नवंबर 2014 को पड़े छापों में 130 करोड़ से ज्यादा कैश और 400-500 करोड़ के लेन-देन के दस्तावेज बरामद हुए थे. आरोप के मुताबिक इन पर भी नरेंद्र मोदी का नाम दर्ज है. इसके ठीक छह महीने बाद मई 2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन गए. हालांकि इस डायरी में दिल्ली की सीएम शीला दीक्षित समेत कई मुख्यमंत्रियों का जिक्र है.

First published: 11 January 2017, 16:39 IST
 
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