Home » राजनीति » Supreme Court says there is no justification for the government to hold the Lokpal Act in abeyance.
 

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को लोकपाल नियुक्त करने के दिए आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 April 2017, 13:48 IST

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को आदेश दिए हैं कि वो जल्द से जल्द लोकपाल की नियुक्ति करें. इसके लिए एक्ट में संशोधन का इंतजार नहीं किया जा सकता. आप एक्ट के बिना संशोधन के भी लोकपाल की नियुक्ति कर सकते हैं. 

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार से कहा कि केंद्र के पास इसका कोई जस्टिफिकेशन नहीं है कि इतने वक्त तक लोकपाल की नियुक्ति को सस्पेंशन में क्यों रखा गया है. गौरतलब है कि 28 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था. केंद्र सरकार की ओर से पेश AG मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोकपाल की नियुक्ति वर्तमान हालात में संभव नहीं है.

लोकपाल बिल में कई सारे संशोधन होने हैं जो संसद में लंबित हैं. कांग्रेस ने नेता विपक्ष का दर्जा मांगा था लेकिन स्पीकर ने खारिज कर दिया. इससे पहले भी ऐसा हुआ है जब संसद में नेता विपक्ष ना हो. इस संबंध में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को शामिल करने संबंधी संशोधन मॉनसून सत्र में पास होने की उम्मीद है.

ये मामला न्यायपालिका में नियुक्ति का नहीं है बल्कि लोकपाल की नियुक्ति का है. न्यायपालिका को संसद के अधिकारों के बंटवारे का सम्मान करना चाहिए और संसद को ये निर्देश जारी नहीं करने चाहिए कि लोकपाल की नियुक्ति करे. संसद में लोकपाल बिल में करीब 20 संशोधन लंबित हैं. दरअसल लोकपाल बिल में 2014 में संशोधन प्रस्ताव लाया गया था लेकिन स्टैंडिंग कमेटी ने एक साल ले लिया था.

सुप्रीम कोर्ट कामन काउज नाम गैर सरकारी संगठन द्वारा जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने कहा कि अदालत को इस मामले में दखल देना चाहिए और सबसे बड़े विपक्षी दल को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दे देना चाहिए. लोकपाल की नियुक्ति के लिए सरकार दिलचस्पी नहीं ले रही है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जान-बूझकर संशोधन विधेयक को रोक रखा है. वहीं दूसरी तरफ, सीबीआई प्रमुख, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और केंद्रीय सूचना आयुक्त की नियुक्ति के मामले में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दे दिया गया है. शांति भूषण ने कहा कि लोकपाल विधेयक वर्ष 2013 में पारित हो गया था और वर्ष 2014 में प्रभावी हो गया था बावजूद इसके अब तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो सकी है.

First published: 27 April 2017, 13:48 IST
 
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