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'अम्मा' के बाद 'चिनम्मा' एआईएडीएमके की नई चीफ

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 December 2016, 15:32 IST
(फाइल फोटो)

तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके की कमान शशिकला के हाथों में चली गई है. पार्टी ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर इस बारे में घोषणा कर दी है.  

एआईएडीएमके के प्रवक्ता सी पोन्नियन ने संवाददाताओं से कहा, “यह साफ है कि चिनम्मा (शशिकला) पार्टी की अगली महासचिव होंगी.” एआईडीएमके के प्रवक्ता ने कहा कि पूरी पार्टी, कार्यकर्ता और तमिलनाडु की जनता चाहती है कि शशिकला को कमान मिले.

इसके अलावा एआईडीएमके की जिला यूनिट्स ने प्रस्ताव पास करके शशिकला को पार्टी का जनरल सेक्रटरी बनाए जाने पर मुहर लगाई. वहीं तमिलनाडु के कुछ किसान संगठनों के नेताओं ने भी शशिकला से मुलाकात करके उनसे सत्ता संभालने का आग्रह किया था.

शशिकला के समर्थन में सीएम पन्नीरसेल्वम

मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम की तरफ से पार्टी की कमान शशिकला को संभालने की अपील के बाद इस मुद्दे पर एआईएडीएमके के अन्य मंत्रियों और सांसदों ने शशिकला के नाम पर अपना समर्थन दिया.

एआईडीएमके लोकसभा के डिप्टी स्पीकर एम थंबीदुराई ने सभी सांसदों की तरफ से शशिकला से कहा कि वह पार्टी की अगुआई करें क्योंकि जयललिता के गुजर जाने के बाद पार्टी के जनरल सेक्रटरी का पद खाली है.

गौरतलब है कि दिवंगत जयललिता सात बार पार्टी की महासचिव चुनी गई थीं. एआईएडीएमके में आखिरी बार चुनाव अगस्त 2014 में हुए थे.

एआईडीएमके की महासचिव और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का पांच दिसंबर की रात निधन हो गया था. उनका अंतिम संस्कार शशिकला ने ही किया था.

शशिकला से जयललिता की नजदीकी इतनी थी कि कई अवसरों पर जया उन्हें अपनी बहन के रूप में परिचय कराती थीं

इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि अम्मा के बाद चिनम्मा ही पार्टी की कमान संभालेंगी. शशिकला का पदार्पण जयललिता के जीवन में लगभग तीस साल पहले हुआ. साल 1991 से जयललिता की मृत्यु कर शशिकला उनके साये की तरह हमेशा साथ रहीं.

इस समय से जयलिलता के दिवंगत होने तक लोग यही जानते थे कि शशिकला उनकी सहयोगी और देखभाल करने वाली हैं.

मृत्यु तक जयललिता के साथ खड़ी रहीं शशिकला हमेशा उनके साथ बनी रहती थीं, चाहे घर हो, चुनावी कैंपेन हो, मंदिर हो या फिर जेल.

शशिकला ने हर मौके पर जयललिता का साथ निभाया. शशिकला के प्रति जयललिता के विश्वास को इसी बात से समझा जा सकता है कि कई अवसरों पर खुद जयललिता उनका परिचय अपनी बहन के रूप में देती थीं.

बताया जा रहा है कि जयललिता, शशिकला की तुलना अपनी मां से किया करती थीं. वे कहती थीं, अगर उनकी मां जीवित होतीं तो वे भी जयललिता का वैसे ही ख्याल रखतीं जैसे शशिकला ने रखा.

दोनों के संबंध इतने प्रगाढ़ और जटिल थे कि शशिकला को दो बार निकालने के कुछ ही समय में जयललिता ने उनको वापस बुला लिया.

कहा तो यह भी जाता है कि जयललिता के साथ रहने के लिए शशिकला को अपना वैवाहिक जीवन तक छोड़ना पड़ा था.

First published: 15 December 2016, 15:32 IST
 
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