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शुक्रिया भाजपा यह बताने के लिए कि सभी आतंकी मुसलमान हैं

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:36 IST

भाजपा सांसद का बयान कि मुसलमान आतंकी हैं, निश्चित रूप से भाजपा का ‘न्यू नॉर्मल’ है. एक विवादास्पद बयान, जो सिर्फ अगला विवाद उठने तक ही चर्चा में रहेगा.

दिल्ली से भाजपा सांसद परवेश साहिब सिंह ने हाल में सभी मुसलमानों को आतंकी बताया और इसका विरोध तक नहीं हुआ. थोड़े-बहुत शोर के सिवा. सिंह ने यह बयान उत्तरप्रदेश के बागपत में रिपोटर्स के सामने हाल ही में दिया. उन्होंने कहा कि ‘मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते क्योंकि भाजपा देशभक्त पार्टी है.’

यह कोई इकलौती टिप्पणी नहीं है, बल्कि पूरी तरह सोचा-समझा बयान है, जिसे रुक-रुक कर और काफी सोच-विचार कर जारी किया जाता है. जैसा कि वीडियो से साफ नजर आ रहा था. ‘हम किसी वोट बैंक की चिंता नहीं करते.’ उन्होंने अपनी बात जारी रखी कि ‘मुसलमानों’ ने हमें कभी वोट नहीं दिया और न ही भविष्य में देंगे.

अपने बयान को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने कहा कि देश में हर आतंकी मुसलमान था और भाजपा एक देशभक्त पार्टी है. उन्होंने आगे कहा कि भाजपा किसी समुदाय की चिंता नहीं करती और राम मंदिर का निर्माण करेगी.

उनके बयान का मतलब सीधा है कि सभी मुसलमान आतंकी हैं और उनके इस बात को कहने के पीछे संदेश है कि पार्टी को उनके वोटों की जरूरत नहीं है. और यह बयान उन्होंने सांप्रदायिक रूप से बेहद संवेदनशील पस्चिमी उत्तर प्रदेश के एक दौरे पर दिया जहां मुजफ्फरनगर के दंगों की आंच अभी भी बनी हुई है.

कथन की पांच वजह:

  1. सिंह उत्तर प्रदेश से बोल रहे थे, जहां चुनाव होने हैं. भाजपा 15 साल बाद यहां फिर सत्ता में आने की महत्वाकांक्षा पाले है.
  2. 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी सांप्रदायिक रणनीति से सत्ता में आई थी. 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों से उसे भारी लाभ मिला था.
  3. परवेश सिंह को जाटों की विरासत अपने पिता साहिब सिंह वर्मा से मिली है. वे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री थे और यूपी के जिन इलाकों में दौरा कर रहे हैं, वहां ज्यादातर जाटों का बाहुल्य है.
  4. यह जाट-मुस्लिम के बीच सांप्रदायिक कलह को फिर से भड़काने की कोशिश है, जो उनकी पार्टी की मौजूदा थीम है क्योंकि यह मुजफ्फरनगर के दंगों का केंद्र था.
  5. राम मंदिर, बेशक भाजपा का स्थाई सहारा है, जिसे वह जब भी उसका चुनावी मुहिम कमजोर पड़ने लगता है, उसे थामे रहना चाहती है. पर उसके खुद के मानदंड के हिसाब से यह भाजपा के लिए कम स्तर का है.

संसदीय शपथ का उल्लंघन

सिंह को अभी एक कामचलाऊ सपाई देनी होगी जिस तरह उन जैसे राजनेता आमतौर पर देते हैं कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. दरअसल वे बर्लिन में हुए आतंकी हमले के कारण बेहद खिन्न थे.

उन्होंने अपनी तरफ से कोई पश्चाताप जाहिर नहीं किया है, और ना ही पार्टी प्रमुख अमित शाह या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने या भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता ने. इसका मतलब है कि इस बयान को पार्टी और सरकार दोनों का समर्थन है.

अब देश की अवाम को तय करना है कि क्या उनका बयान उचित है. क्या सांसद अब कहेंगे कि वे थोड़े कट्टरपंथी थे? यदि ऐसा कहेंगे, तो क्या संसद सिर्फ देखेगी और उन्हें मूक संरक्षण देगी?

लोकसभा में हर सदस्य को संविधान के अनुसार संकल्प लेना होता है कि वह ‘संविधान में सच्ची निष्ठा और वफादारी रखेगा... और भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखेगा.’ इस तरह के सांप्रदायिक बयान देते रहने वाले भाजपा नेताओं की ब्रिग्रेड में अब परवेश सिंह भी शामिल हो गए हैं.

पर काफी समय से संवैधानिक शक्तियां मौन हैं. क्या एक सांसद द्वारा कट्टरता कि ऐसी खुली अभिव्यक्ति संविधान का उल्लंघन नहीं है? क्या इस तरह का उत्तेजक बयान, खासतौर से एक सांसद का देश की अखंडता पर प्रहार नहीं है? क्या स्पीकर इस पर जरा भी आपत्ति नहीं उठाएंगे? क्या राष्ट्रपति मौन रहेंगे?

यह हमारे लोकतंत्र और उन संस्थाओं की परीक्षा है, जो उसमें प्राण फूंकती हैं. इसमें विफलता रही, तो यह कयामत का संकेत होगा.

First published: 23 December 2016, 8:20 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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