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लोकसभा में ध्वनिमत से ऐतिहासिक तीन तलाक बिल पास, सारे संसोधन नामंजूर

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 28 December 2017, 20:57 IST

लोकसभा में गुरुवार शाम को एक बार में तीन तलाक संबंधी 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक' ध्वनिमत से पारित हो गया. ये विधेयक दिन भरी चली लंबी बहस के बाद लोकसभा में पारित हुआ. इस बिल के खिलाफ सारे संसोधन खारिज हो गए. AIMIM के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी की तरफ से संसोधन प्रस्ताव रखे गए. असदुद्दीन ओवैसी के अलावा कांग्रेस, बीजेडी और सीपीआईएम की तरफ से रखे गए संसोधन प्रस्ताव नामंजूर हो गए.

लोकसभा में हुई वोटिंग के बाद लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने तीन तलाक बिल के पास होने का एलान किया. अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल के पास होने के बाद मोदी सरकार ने इसे एतिहासिक करार दिया. बिल के पास होने की खुशी केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के चेहरे पर साफ दिखी. उन्होंने मेज थपथपाकर इसका स्वागत किया.

इससे पहले प्रश्नकाल के बाद गुरुवार को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बिल को पेश किया. इस बिल को पेश करते हुए रविशंकर प्रसाद ने सभी दलों से इसे पास करने की अपील की. इस बिल को लोकसभा में रखते हुए रविशंकर ने सदन में कहा, "ये बिल प्रार्थना, रिति-रिवाज और धर्म का नहीं है बल्कि नारी न्‍याय और इंसाफ का है. सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया है. इसके बाद भी अगर ये पाप किया जा रहा है तो इस पर सदन खामोश रहेगा? अब ये सदन को तय करना है तीन तलाक कि ये पीड़ित महिलाओं का मौलिक अधिकार है या नहीं."  

रविशंकर ने आगे कहा कि हम शरीयत में दखल नहीं करने जा रहे हैं. हम सिर्फ एक बार में तीन तलाक को रोकने के लिए बिल ला रहे हैं. सु्प्रीम कोर्ट के इसे गैरकानूनी ठहराने के बाद अब एक बार में तीन तलाक के 100 मामले सामने आए हैं. रविशंकर प्रसाद ने इस्लामिक देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब इस्लामिक मुल्कों ने भी तीन तलाक को रेगुलेट किया है तो हमारा देश सेकुलर होकर उसे क्यों नहीं रेगुलेट कर सकता.

लोकसभा में रविशंकर प्रसाद के बिल पेश करने के बाद इस पर लंबी बहस चली. लोकसभा के सांसद और AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक विधेयक पर कई सवाल उठाए हैं. उन्होने कहा कि ये बिल मौलिक अधिकारों का हनन करता है. इसके साथ ही इस बिल में कई कानूनी विसगतिंया हैं. उन्होंने कहा कि यदि तीन तलाक पर पुरुष को जेल भेजा जाता है तो गुजारे भत्‍ते का भुगतान कौन करेगा.

तीन तलाक विधेयकर पर मोदी सरकार को कांग्रेस से भी समर्थन मिला. हालांकि उन्होंने इस पर अपनी कुछ चिंताएं व्यक्त की. लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम सब इस बिल के समर्थन में हैं. लेकिन इस बिल को लेकर हमारी कुछ आपत्तियां हैं. जिन्हें सही करने के लिए स्थाई समिति के पास भेजा जाना चाहिए. हम एक निश्चित समय में साथ बैठकर इसे दूर कर सकते हैं. बीजेडी ने तीन तलाक बिल का विरोध किया वहीं  RJD ने बिल पर आपत्ति जताए हुए तीन तलाक बिल में सजा के प्रावधान का विरोध किया.

तीन तलाक पर ये हैं प्रावधान-

इस बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक लेने वाले शख्स को तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस विधेयक में किया गया है.

ये बिल पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा. इस बिल के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

First published: 28 December 2017, 20:54 IST
 
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