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डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम बदले जाने से दलित नाराज नहीं: रामदास अाठवले

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 March 2018, 21:38 IST

उत्तर प्रदेश में डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम बदले जाने पर देश भर में राजनीति तेज हो गई है. मोदी  सरकार में मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि अंबेडकर नाम बदले जाने में कोई बुराई नहीं है. अंबेडकर महाराष्ट्र के हैं और यहां कई जगह पर पिता का नाम भी पुत्र के नाम के साथ लिखा जाता है. आठवले ने आगे कहा कि संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर के जीवन में उनके पिता 'रामजी' का भी काफी योगदान रहा है. इसलिए अगर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम के बीच में रामजी लिखा गया है, तो इसमें विरोध की कोई बात नहीं है.

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े दलित नेताओं में गिने जाने वाले रामदास अठावले ने बीजेपी के दलित नेता उदित राज के विरोध जताने पर अपनी असहमति जताई. रामदास अठावले ने कहा, 'उदित राज के अपने विचार हो सकते हैं. लेकिन मेरा मानना है कि इस से कोई नाराज नहीं होगा. मैं ऐसा नहीं मानता हूं कि दलितों में नाराजगी होगी'. उन्होंने आगे कहा, 'यह उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला है यूपी में लागू होगा पूरे देश में नहीं है. मैं तो शुरू से ही डॉ भीमराव अंबेडकर बोलता हूं और आगे भी डॉ भीमराव अंबेडकर ही बोलूंगा.'

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गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक की सलाह के बाद योगी सरकार ने ये फैसला लिया है. अब डॉ.भीमराव का नाम 'डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर' होगा. राज्यपाल रामनाइक ने इसको लेकर 2017 में एक कैंपेन चलाया था. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी खत लिखा था.

जिसके बाद अब देश भर में इस मुद्दे पर सियासी गहमा-गहमी बनी है. नाइक ने कहा कि मैं एक मराठी हूं, बाबा साहेब डॉ. भीमराव भी मराठी थे. हिंदी भाषी राज्य उनका नाम गलत तरीके से लिखते थे, जिसे मैंने ठीक करवाया है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा 'भीम राव' भी दो शब्दों में लिखा जाता था, लेकिन वह एक ही शब्द 'भीमराव' है. नाइक ने बताया बाबा साहेब जो अपने हस्ताक्षर करते थे, उसमें भीमराव रामजी अंबेडकर ही लिखते थे.

First published: 29 March 2018, 19:50 IST
 
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