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एक और दलित MP ने मोदी को पत्र लिखकर जताई नाराजगी, कहा चार साल में कुछ नहीं किया

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 April 2018, 10:21 IST

अपनी ही पार्टी के नेताओं की वजह से बीजेपी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है. एक ओर जहां बीजेपी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी को लेकर दिन रात एक कर रही है, तो वहीं पार्टी के दलित नेता लगातार पीएम मोदी के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं.

बीजेपी की दलित सांसद सावित्री बाई फुले से शुरु हुआ ये सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है. अब बीजेपी के ही एक और दलित सांसद ने पीएम मोदी पर चार साल में दलितों के लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाया है. यूपी के नगीना से बीजेपी के सांसद डॉ. यशवंत सिंह ने मोदी सरकार से नाराजगी जताई है.

सांसद डॉ. यशवंत सिंह ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है. बता दें कि इससे पहले बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले, उदित राज, छोटे लाल और अशोक कुमार दोहरे भी पार्टी से अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. बीजेपी सांसद डॉ यशवंत सिंह ने केंद्र सरकार पर दलितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है.

उन्‍होंने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले चार साल में केंद्र सरकार ने दलितों के लिए कुछ भी नहीं किया. उन्होंने पत्र में लिखा है कि प्रमोशन में आरक्षण, बैक लॉग पूरा करना और निजी क्षेत्र में आरक्षण पर कुछ नहीं किया गया.

सांसद डॉ. यशवंत ने पत्र में आगे लिखा है कि ये समाज सरकार की अच्छी नीति के बगैर तरक्की नहीं कर सकता. हम जब संसद में चुनकर आए थे और आपका वक्तव्य सुना था कि ये सरकार गरीबों, दलितों वंचितों की सरकार है तो दिल खुश हो गया कि आप जरूर इस दलित पिछड़े समाज को प्रत्यक्ष हितों का ध्यान करके आरक्षण बिल पास कराएंगे.

उन्होंने आगे लिखा कि बीजेपी के दलित सांसद अपने समाज की रोज-रोज की प्रताड़ना के शिकार हैं और जवाब देना मुश्किल हो रहा है. डॉ सिंह ने कहा कि सरकार विशेष भर्ती अभियान के जरिए बैकलॉग पूरा कराए, प्रमोशन में आरक्षण दिलाए और निजी क्षेत्र में आरक्षण हो. पत्र में एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को पैरवी कर पलटवाने की अपील भी की गई है.

बता दें कि शुक्रवार को इटावा से दलित सांसद अशोक दोहरे ने भी अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार से नाराज होकर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी थी. जिसमें उन्होंने कहा था कि 2 अप्रैल को 'भारत बंद' के बाद एससी/एसटी वर्ग के लोगों को उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में सरकारें और स्थानीय पुलिस झूठे मुकदमे में फंसा रही है उन पर अत्याचार हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस निर्दोष लोगों को जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए घरों से निकाल कर मारपीट कर रही है. इससे इन वर्गों में गुस्सा और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है.

First published: 7 April 2018, 10:21 IST
 
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