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उत्तर प्रदेश: 40 साल बाद पार किया है भाजपा ने 320 का आंकड़ा, जानिए इस प्रचंड जीत के मायने

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 12 March 2017, 12:33 IST

उत्तर प्रदेश में 17वीं विधानसभा चुनाव के परिणाम शनिवार को आ गए. यह नतीजे बताते हैं कि 1977 में जनता पार्टी की लहर (352 सीटें) के 40 सालों बाद अब मोदी के नेतृत्व में भाजपा को 312 सीटें आई हैं और प्रदेश को जबर्दस्त बहुमत वाली सरकार दी है.

उत्तर प्रदेश का यह चुनाव कई मायनों में खास रहा. पिछले 40 सालों में इस बार सबसे ज्यादा करीब 61.14 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले. इससे पहले 2012 के पिछले चुनाव में 59.40 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले थे.

जनता पार्टी द्वारा 1977 में कुल 425 में से 422 सीटों पर चुनाव लड़ा गया था और पार्टी ने 352 पर जीत हासिल की थी. उस दौरान प्रदेश में कुल 46.14 फीसदी मतदान ही हुआ था.

2017

सात चरणों में हुए इस चुनाव में 403 सीटों पर कुल 14.05 करोड़ मतदाताओं में से करीब 61 फीसदी यानी 8.57 करोड़ मतदाताओं ने पोलिंग बूथ का रुख किया.

भारतीय जनता पार्टी ने मोदी सूनामी में 312 सीटों पर जीत हासिल की. जबकि सत्ताधारी समाजवादी पार्टी को केवल 47, बसपा को 19, कांग्रेस को 7 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा.

2012
मौजूदा दशक के इस चुनाव में 12,74,92,836 वोटर्स का नाम मतदाता सूची में शामिल था. इसमें से 7,57,25,793 यानी 59.40 फीसदी वोटर्स ने मतदान किया.

इस बार जनता ने समाजवादी पार्टी को 224 सीटों पर जिताया था जबकि सत्ताधारी बसपा को 80 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. भाजपा के पास इस बार 47, कांग्रेस के पास 28 और रालोद के पास 9 सीटें आईं.

2007
प्रदेश के 11,35,49,350 मतदाताओं में से इस चुनाव में 5,21,81,826 मतदाताओं यानी 45.96 फीसदी ने ही मताधिकार का प्रयोग किया था.

इस चुनाव में बसपा ने कमाल दिखाया और सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद 206 सीटों पर कब्जा जमाया. समाजवादी पार्टी इस चुनाव में 97 सीटों पर ही सिमट गई जबकि भाजपा की झोली में 51 सीटें आईं और कांग्रेस 22 सीटें जीत सकीं.

2002
इस चुनाव में उत्तराखंड अलग हो चुका था और यूपी में कुल 403 सीटें ही बचीं. इनमें 9,97,56,327 मतदाताओं में से
5,36,68,674 यानी 53.80 फीसदी ने अपने वोट डाले.

इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 390 सीटों पर चुनाव लड़ा और 143 पर जीत हासिल की. जबकि भाजपा ने 320 में से 88 और बसपा ने 401 में से 98 सीटों पर कब्जा जमाया. कांग्रेस इस दौरान 402 में से 25 सीटें ही हासिल कर सकी.

1996
इस चुनाव में 424 सीटों पर 10,09,05,819 मतदाताओं में से 55.73 फीसदी यानी 5,62,32,609 वोटर्स ने मतदान केंद्रों का रुख किया.

इस चुनाव में 174 सीटों के साथ भाजपा नंबर एक की पार्टी बनी, जबकि समाजवादी पार्टी ने 110, बसपा ने 67 और कांग्रेस ने 126 में से 33 सीटें हासिल की.

1993
इस दौरान 422 सीटों पर चुनाव हुए और 8,95,30,741 मतदाताओं में से ऐतिहासिक रूप से 57.13 फीसदी यानी 5,11,46,036 वोटर्स ने चुनाव में हिस्सा लिया.

इसके बाद सभी सीटों पर सीट लड़ने वाली भाजपा को केवल 177 सीटें ही मिलीं. जबकि समाजवादी पार्टी को 256 में से 109, कांग्रेस को 28 और जनता दल को 27. इस दौरान बहुजन समाज पार्टी ने भी अपना उदय किया और प्रदेश में 164 सीटों पर लड़ने के बाद 67 सीटें जीतीं.

1991
यह चुनाव भी कई मायनों में खास रहा और प्रदेश में इस वक्त तक 419 सीटें बची थीं. इन सीटों पर 8,06,11,267 मतदाताओं में से 3,91,05,401 यानी 48.51 फीसदी ने वोट डाले और बदलाव को हवा दी.

आलम यह हो गया कि राम मंदिर मुद्दे के चलते 415 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी ने 221 सीटों पर जबर्दस्त जीत हासिल की. जबकि कांग्रेस को 413 में से 46 और जनता दल को 374 में 92 सीटों पर ही जीत मिल सकी.

1989
प्रदेश में इस बार पिछले एक दशक से भी ज्यादा वक्त में बंपर मतदान हुआ और 7,95,60,897 मतदाताओं में से 51.43 फीसदी (4,09,17,962) ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

इस चुनाव में 356 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली जनता दल पार्टी ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए कुल 208 सीटों पर कब्जा जमाया और 410 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को 94 पर ही समझौता करना पड़ा. इस दौरान भाजपा ने 57 सीटें जीतीं.

1985
इस बार प्रदेश की 425 सीटों पर मतदाताओं की संख्या 6,54,40,531 थी, जिनमें से 45.64 फीसदी यानी 2,98,52,128 ने अपने वोट का इस्तेमाल किया था.

इस दौरान भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 425 में से 269 सीटों पर जीत दर्ज की. लोकदल ने 84, जनता पार्टी ने 20 और भाजपा ने 16 सीटों पर कब्जा जमाया था.

1980
इसके बाद 1980 में कुल 425 सीटों पर 5,85,20,466 मतदाताओं में से 2,62,88,674 यानी 44.92 फीसदी ने अपने वोट डाले. इस चुनाव में जनता दल को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था और 424 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस (आई) पार्टी को 309 सीटों पर जबर्दस्त जीत मिली थी.

इस दौरान कई हिस्सों में बंट चुकी जनता पार्टी के हिस्से जेएनपी (एससी) को सर्वाधिक 59 सीटें ही मिली थीं. इस चुनाव में भाजपा को 400 में से 11 सीटें मिली थीं जबकि सीपीआई को 7 पर ही संतोष करना पड़ा था.

1977
चुनाव आयोग द्वारा जारी नतीजों की मानें तो 1977 में उत्तर प्रदेश (उस वक्त उत्तराखंड भी शामिल था) में कुल 425 विधानसभा सीटें थीं. इनमें कुल 5 करोड़ 23 लाख 45 हजार 606 मतदाता थे. इनमें 2 करोड़ 41 लाख 52 हजार 656 यानी 46.14 फीसदी ने मतदान किया था.

इस चुनाव में जनता दल ने 422 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसकी लहर के चलते पार्टी ने 352 सीटों पर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. जबकि इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के 395 उम्मीदवारों को केवल 47 सीटों पर ही जीत से संतोष करना पड़ा था.

First published: 12 March 2017, 9:35 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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