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देवभूमि का दंगल: उत्तराखंड में इन 5 सीटों पर सुपरहिट संग्राम

सुधाकर सिंह | Updated on: 13 February 2017, 12:29 IST
(कैच)

उत्तराखंड में विधानसभा की 69 विधानसभा सीटों के लिए 15 फरवरी को मतदान होगा. कर्णप्रयाग सीट पर बीएसपी उम्मीदवार की सड़क हादसे में मौत होने की वजह से चुनाव को टाल दिया गया है.

यहां 75 लाख 12 हजार 559 मतदाता कुल 637 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में कैद करेंगे. एक चरण के इस चुनाव में 62 महिला प्रत्याशी भी मैदान में हैं. चुनाव आयोग ने यहां 10,854 पोलिंग बूथ बनाए हैं.

ख़ास बात यह है इस चुनाव में कई चेहरे ऐसे हैं, जो देहरादून से लेकर दिल्ली तक सियासत में दखल रखते हैं. चाहे मुख्यमंत्री हरीश रावत हों, या सतपाल महाराज. एक नजर पांच ऐसी सीटों पर जहां के मुकाबले पर हर किसी की नज़र है:

कैच

हरीश रावत 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत इस बार दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. हरिद्वार ग्रामीण के अलावा ऊधम सिंह नगर जिले की किच्छा सीट से भी वह चुनावी समर में हैं. हरिद्वार ग्रामीण से बीजेपी ने उनके खिलाफ वर्तमान विधायक यतीश्वरानंद को मैदान में उतारा है.  

रावत किच्छा से भी चुनाव लड़ रहे हैं. करीब एक लाख 17 हजार मतदाताओं वाली किच्छा विधानसभा क्षेत्र में 36 हजार मुस्लिम मतदाता हैं. दस हजार ऐसे मतदाता हैं, जिन्हें पूर्वांचल का कहा जाता है. करीब पांच हजार मतदाता पर्वतीय मूल के हैं. पूरी तरह से मैदानी यह विधानसभा सीट रुद्रपुर और सितारगंज विधानसभा से भी सटी हुई है.

रावत के खिलाफ भाजपा ने राजेश शुक्ला और बीएसपी ने राजेश प्रताप सिंह को उतारा है. वहीं कांग्रेस महामंत्री पद से इस्तीफा देकर बगावत करने वाली शिल्पी अरोड़ा भी यहां से रावत के खिलाफ बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ रही हैं. पीएम मोदी ने 12 फरवरी को रुद्रपुर में जनसभा के दौरान हरीश रावत को जमकर निशाने पर लिया था. 

ट्विटर

सतपाल महाराज

बीजेपी की तरफ से सतपाल महाराज इस चुनाव में सबसे बड़ा चेहरा माने जा रहे हैं. बीजेपी अगर चुनाव जीतती है तो उनको सीएम कैंडीडेट की रेस में भी सबसे आगे बताया जा रहा है. 

सतपाल महाराज चौबट्टाखाल से चुनाव लड़ रहे हैं. उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के ज्यादातर बड़े नेता बगावत करके बीजेपी में शामिल हुए हैं. सतपाल का नाम भी इसी लिस्ट में है. हालांकि अंतर ये है कि सतपाल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हुए थे.

चौबट्टाखाल उनका गृहक्षेत्र भी है. दलबदल और टिकट कटने से बीजेपी में गुटबाजी सतपाल महाराज के लिए बड़ी मुश्किल है. यहां से दो बार उनकी पत्नी अमृता रावत विधानसभा का चुनाव जीत चुकी हैं. उत्तराखंड में कथा वाचक के रूप में भी सतपाल महाराज काफी मशहूर हैं. यह चुनाव उनकी सियासत का भी लिटमस टेस्ट है. पौड़ी जिले की इस सीट से कांग्रेस ने राजपाल बिष्ट को टिकट दिया है.

एएनआई

हरक सिंह रावत

हरक सिंह रावत वो चेहरा हैं, जो उत्तराखंड में संवैधानिक संकट के दौरान हरीश रावत के खिलाफ बागी होकर सबसे ज्यादा मुखर रहे थे. बीजेपी ने हरक को कोटद्वार से उम्मीदवार बनाया है. अभी वे रुद्रप्रयाग से विधायक हैं. 

विवादित नेता हरक सिंह रावत पर तीन बार महिलाओं के साथ यौन शोषण और दुष्कर्म के आरोप लग चुके हैं. मार्च, 2016 में हरक सिंह ने अपने कुछ साथी विधायकों के साथ मिलकर हरीश रावत के खिलाफ बगावत की थी, जिसके बाद रावत सरकार अल्पमत में आ गई थी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हुए बहुमत परीक्षण में हरीश रावत ने बाजी मार ली थी.

पौड़ी जिले की कोटद्वार सीट पर हरक के सामने कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी को उम्मीदवार बनाया है. कोटद्वार नेगी का गृहक्षेत्र है. ऐसे में हरक सिंह रावत के लिए चुनौती आसान नहीं है.

किशोर उपाध्याय

सहसपुर सीट से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय चुनाव लड़ रहे हैं. वे 2002 और 2007 में टिहरी सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे. 

2012 में वह दिनेश धनै से हार गए थे. बीजेपी के अलावा इस बार किशोर के सामने उन्हीं की पार्टी के बागी अार्येंद्र शर्मा भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं. ऐसे में किशोर के लिए मुकाबला सीधा नहीं है. 

अजय भट्ट

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट रानीखेत विधानसभा सीट से मैदान में हैं. उनके मुकाबले में बीजेपी युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद नैनवाल हैं. प्रमोद बतौर निर्दलीय उम्मीदवार उन्हें टक्कर दे रहे हैं. 2012 के चुनाव में अजय भट्ट ने महज 78 वोटों से जीत दर्ज की थी.

उत्तराखंड में बीजेपी में टिकट बंटवारे के बाद बगावत पर उतरे करीब 3 दर्जन नेताओं को अजय भट्ट पार्टी से बाहर कर चुके हैं. ऐसे में इस चुनाव में उन्हें अपनों से भी जूझना पड़ रहा है. यहां के नतीजे पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की ख़ास नज़र रहेगी.

केबीके पोलग्राफिक्स
First published: 13 February 2017, 13:42 IST
 
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